Report by : उमेश चन्द्र त्रिपाठी
उत्तर प्रदेश के राजनीतिक इतिहास में मुख्य रूप से दो बड़े और चर्चित ब्राह्मण बाहुबली नेता हुए हैं, जिन्होंने कम उम्र (युवावस्था) में जेल के अंदर रहते हुए विधानसभा चुनाव जीता और विधायक बनकर विधानसभा पहुंचे।
पंडित हरिशंकर तिवारी (पंडित जी)
यह न केवल यूपी बल्कि देश के पहले ऐसे ब्राह्मण नेता थे जिन्होंने जेल के अंदर बंद रहते हुए चुनाव जीता था।
साल 1985 में जब वे जेल में बंद थे, तब उन्होंने गोरखपुर की चिल्लूपार विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और एक बड़े कांग्रेसी नेता को हराकर भारी मतों से जीत हासिल की। वे चिल्लूपार सीट से लगातार 6 बार विधायक रहे और कई सरकारों में कैबिनेट मंत्री भी बने।
अमरमणि त्रिपाठी
इन्हें भी पूर्वांचल की राजनीति में एक बड़ा ब्राह्मण चेहरा माना जाता है।
अमर मणि त्रिपाठी ने साल 2007 में जेल के भीतर रहते हुए ही चुनाव लड़ा था। वे मशहूर कवयित्री मधुमिता शुक्ला हत्याकांड के आरोप में जेल में बंद थे।
उन्होंने जेल की सलाखों के पीछे से ही समाजवादी पार्टी के टिकट पर महाराजगंज की नौतनवां विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और बड़ी जीत दर्ज की थी।
इसके अलावा, अमर मणि त्रिपाठी के बेटे अमन मणि त्रिपाठी ने भी 2017 में अपनी पत्नी सारा सिंह की हत्या के आरोप (जिसमें वे बाद में जमानत पर बाहर आए) के साये के बीच नौतनवां सीट से निर्दलीय चुनाव जीता था, हालांकि उनका मामला पिता की तरह सीधे जेल से चुनाव जीतने का पूरी तरह नहीं था।

मुख्य रूप से जेल से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचने वाले यूपी के सबसे चर्चित युवा/बाहुबली ब्राह्मण चेहरों में हरिशंकर तिवारी और अमरमणि त्रिपाठी का नाम सबसे ऊपर आता है।


