राजनीति में अमर मणि और अमन मणि की उल्टी गिनती शुरू,कहानी लगभग खत्म, कांग्रेस ने भी बनाई दूरी?

राजनीति में पहली बार हासिए पर आया मणि परिवार 

कोई भी पार्टी टिकट देने को तैयार नहीं?

चुनाव लड़ने के लिए बिन पानी के मछली की तरह छटपटा रहा है मणि खेमा 

बीस साल में अर्श से फर्श पर आ गये पिता-पुत्र

उमेश चन्द्र त्रिपाठी 

महराजगंज! पूर्वांचल के सबसे बड़े बाहुबली कहलाने वाले पूर्व मंत्री अमर मणि त्रिपाठी और उनके पूर्व विधायक पुत्र अमन मणि त्रिपाठी को बीते मंगलवार को करारा झटका लगा। फरेंदा और नौतनवां विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने का दंभ भरने वाले इन दोनों नेताओं ने मंगलवार को कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव अभिषेक दत्त और कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत के महराजगंज दौरे के दौरान अमन मणि त्रिपाठी अपने दल-बल के साथ उनसे मिलने जा रहे थे पर कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष विजय सिंह एडवोकेट के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं के भारी विरोध के कारण अमन मणि त्रिपाठी उन दोनों नेताओं से नहीं मिल सके लेकिन पूर्व मंत्री अमर मणि त्रिपाठी गोरखपुर एअरपोर्ट पर अपने कुछ समर्थकों के साथ पहुंच गए और उन्होंने अभिषेक दत्त को गुलदस्ता भेंट कर उनका स्वागत किया। इस दौरान कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत दूरी बनाते दिखाई दीं। 1981 के बाद यह पहला अवसर है जब राजनीति में मणि परिवार पूरी तरह से हासिए पर आ गया है? 

ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या अमर मणि त्रिपाठी और अमन मणि त्रिपाठी के लिए सारी राजनीतिक पार्टियों ने अपने दरवाजे बंद कर लिए? 

अभी तक पूर्वांचल के इस बाहुबली नेता के बगैर को सरकार नहीं बनती थी अमर मणि त्रिपाठी सरकार बनाने और बिगाड़ने वाले नेताओं में सुमार थे लेकिन आज सारी राजनीतिक पार्टियां उनसे परहेज करने लगीं हैं? 

बीते मंगलवार को कांग्रेस के एक कार्यक्रम में इन दोनों नेताओं का जाना तो यही दर्शाता है कि अमर मणि त्रिपाठी और अमन मणि त्रिपाठी से सारी राजनीतिक पार्टियों ने दूरी बना ली है? 

अभी इन दोनों नेताओं द्वारा उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष और केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से गहरे संबंधों के कसीदे गढ़े जा रहे थे पर अब ऐसा लग रहा है कि मामला जब नहीं बना तो ये दोनों नेता कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय सचिव अभिषेक दत्त से मिलने चले गए पर वहां वह सम्मान नहीं मिला जो सोचकर वह गये थे। समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने भी अब इन दोनों नेताओं से दूरी बना ली है ऐसी राजनैतिक हल्कों में चर्चा है?

तो क्या इन इन दोनों नेताओं को निर्दल ही चुनाव लड़ना पड़ेगा। बड़े बुजुर्गो ने एक कहावत कहा था कि “बनले पर सार बहुत मिलेलं पर बिगड़ले पर बहनोई भी नाहीं मिलेलं” यह कहावत अब पूरी तरह से चरितार्थ होती नजर आ रही है। 

कहते हैं कि जो व्यक्ति दूसरे के लिए कुंआ खोदता है ईश्वर उसके लिए पहले से ही खाई खोदकर रखते हैं और अब अमर मणि त्रिपाठी व अमन मणि त्रिपाठी उसी दौर से गुजर रहे हैं।

आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में इन दोनों नेताओं का क्या हश्र होगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा लेकिन एक बात साफ हो गया है राजनीति में इन दोनों नेताओं की उल्टी गिनती शुरू हो गई है? 

बता दें कि समुद्र से बाहर निकलने पर जिस तरह से मछली तड़पती है उसी तरह से राजनीति के इस महाभारत के चक्रव्यूह से निकलने के लिए पूरा मणि परिवार तड़पता दिखाई दे रहा है।

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