पानी की टंकी रोकने के बाद वापस कराई गई, पर्ची पर था सुभाष जायसवाल का नाम; SSB ने नियमों के तहत कार्रवाई को बताया जिम्मेदारी
महराजगंज। भारत-नेपाल सीमा के सोनौली में SSB और व्यापार मंडल अध्यक्ष सुभाष चन्द्र जायसवाल के बीच विवाद को लेकर नया मोड़ सामने आया है। SSB ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि सुरक्षा बल के अधिकारियों को गलत तरीके से फंसाने की कोशिश की जा रही है। SSB का पक्ष है कि सीमा पर नियमों के तहत कार्रवाई करना उनकी जिम्मेदारी है, न कि किसी व्यक्ति को परेशान करना।
दरअसल, हाल ही में नेपाल से भारत की ओर एक व्यक्ति पानी की टंकी लेकर आ रहा था। संबंधित व्यक्ति टंकी को अपना व्यक्तिगत सामान बता रहा था, लेकिन इसके लिए कटवाई गई पर्ची पर सोनौली उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के नगर अध्यक्ष सुभाष चन्द्र जायसवाल का नाम दर्ज था। सीमा पर जांच के दौरान SSB ने पर्ची देखकर टंकी को रोक दिया। बताया जा रहा है कि पर्ची पर अपना नाम होने की बात सुभाष जायसवाल ने भी स्वीकार की थी।
मामले में एक अहम बात यह भी सामने आई कि जब सुभाष चन्द्र जायसवाल को टंकी रोके जाने की जानकारी हुई तो टंकी को मौके से ही वापस करा दिया गया। इसके बावजूद इस घटना को लेकर विवाद बढ़ गया।
SSB का कहना है कि भारत-नेपाल सीमा से सामान लाने के लिए निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन जरूरी है। सुरक्षा बल द्वारा पर्ची और सामान की जांच करना उसकी नियमित जिम्मेदारी का हिस्सा है। ऐसे में कार्रवाई को व्यक्तिगत रंजिश से जोड़कर अधिकारियों पर आरोप लगाना उचित नहीं है।
SSB के पक्ष के मुताबिक, पानी की टंकी रोके जाने की घटना के बाद ही निरीक्षक मुकेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए गए। बल का कहना है कि ये आरोप निराधार हैं और उन्हें गलत तरीके से फंसाया जा रहा है।
वहीं, सुभाष चन्द्र जायसवाल ने पुलिस अधीक्षक महराजगंज को शिकायती पत्र भेजकर अपनी सुरक्षा की मांग की है। उन्होंने करीब दो महीने पहले सोनौली मुख्य गेट के पूरब की तरफ रात के समय नेपाल से भारत में कथित तस्करी की शिकायत SSB के उच्चाधिकारियों से करने का हवाला देते हुए निरीक्षक पर नाराजगी रखने का आरोप लगाया है।
फिलहाल, पूरे मामले में SSB का कहना है कि उसने सीमा पर अपनी जिम्मेदारी निभाई और टंकी वापस करा दी गई। ऐसे में कार्रवाई को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर सवाल उठ रहे हैं। सीमा सुरक्षा में तैनात जवानों और अधिकारियों का मनोबल बनाए रखना भी जरूरी है। पूरे प्रकरण में तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच ही सच्चाई स्पष्ट कर सकती है।







