महराजगंज में बढ़ी सियासी हलचल, चुनाव से पहले नए समीकरणों की चर्चा
नौतनवां के एक निजी अस्पताल के उद्घाटन समारोह में पंकज चौधरी के साथ बड़ी संख्या में दिखे अमर मणि समर्थक
लगे अमर मणि पंकज चौधरी जिंदाबाद के नारे
चार बार सत्ता में रहकर भी अमर मणि त्रिपाठी ने एक दो कार्यों को छोड़कर कोई अपेक्षित विकास नहीं किया
नौतनवां विधानसभा क्षेत्र में ब्राह्मण मतदाता जिधर जाएंगे उसी पार्टी की होगी जीत
उमेश चन्द्र त्रिपाठी
महराजगंज! महराजगंज जिले के नौतनवां में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के कार्यक्रम के दौरान पूर्व मंत्री अमर मणि त्रिपाठी के समर्थकों की मौजूदगी और उनके समर्थन में हुई नारेबाजी ने जिले के राजनैतिक तापमान को बढ़ाकर राजनीति में एक नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। कार्यक्रम का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसके बाद विधानसभा चुनाव से पहले बदलते राजनीतिक समीकरणों को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि कार्यक्रम में अमर मणि त्रिपाठी और अमन मणि त्रिपाठी दोनों मौजूद नहीं थे।
इसी 30 जुलाई को भारत सरकार के केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी नौतनवां में एक निजी अस्पताल के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। इसी दौरान पूर्व मंत्री अमर मणि त्रिपाठी के बड़ी संख्या में समर्थक भी कार्यक्रम स्थल पर मौजूद रहे और प्रदेश अध्यक्ष के समर्थन में नारेबाजी करते दिखाई दिए।


बता दें कि पूर्व मंत्री अमर मणि त्रिपाठी चर्चित मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में दोष सिद्ध हो चुके हैं और अब जेल से बाहर हैं। ऐसे में उनके समर्थकों की भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के कार्यक्रम में सक्रिय मौजूदगी को लेकर राजनीतिक विश्लेषक इसे आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़कर देख रहे हैं। वहीं पूर्व विधायक अमन मणि त्रिपाठी अपनी पत्नी सारा सिंह की हत्या के मामले में जमानत पर हैं।
हालांकि, इस घटनाक्रम को लेकर भाजपा या अमर मणि त्रिपाठी की ओर से किसी नए राजनीतिक समीकरण पर आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

बता दें कि नौतनवां विधानसभा सीट महराजगंज की सबसे चर्चित सीटों में गिनी जाती है। लंबे समय तक इस क्षेत्र में अमर मणि त्रिपाठी का प्रभाव माना जाता रहा और भाजपा यहां से कभी जीत हासिल नहीं कर पाई।
साल 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा समर्थित निषाद पार्टी के प्रत्याशी ऋषि त्रिपाठी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर बाहुबलियों का मानमर्दन कर दिया था।
इस चुनाव में ऋषि त्रिपाठी ने जीत के लिए पूरा दमखम लगा दिया था। विधायक ऋषि त्रिपाठी ने जनता से जो वादे किए थे काफी हद तक उसे पूरा करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़े।
अमर मणि त्रिपाठी विभिन्न राजनीतिक दलों के टिकट पर नौतनवां से चुनाव लड़ चुके हैं और चार बार 1989,1996,2002और 2007 विधायक भी रहे हैं। हालांकि साल 1981और 1984 में वीरेंद्र प्रताप शाही ने अमर मणि त्रिपाठी को शिकस्त देकर विधायक बन गए थे। साल 2012 में कुंवर कौशल उर्फ मुन्ना सिंह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर पहली बार विधायक बने।
वर्ष 2017 में भाजपा लहर के बावजूद उनके पुत्र अमन मणि त्रिपाठी ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतकर सभी को चौंका दिया था। उस चुनाव में कुंवर कौशल उर्फ मुन्ना सिंह दूसरे और भाजपा के समीर त्रिपाठी तीसरे स्थान पर सिमट गए। स्थानीय राजनीति में लंबे समय तक नौतनवां सीट पर कुंवर परिवार और मणि परिवार का प्रभाव माना जाता रहा है। साल 1991और1993 में नौतनवां सीट से कुंवर अखिलेश सिंह चुनाव जीते थे।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, नौतनवां विधानसभा में करीब 3.49 लाख मतदाता हैं। इनमें ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक मानी जाती है। इसके अलावा दलित, मुस्लिम, यादव, वैश्य और क्षत्रिय मतदाता भी चुनावी परिणामों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में विधानसभा चुनाव से पहले किसी भी राजनीतिक गतिविधि पर सभी दलों की नजर बनी हुई है।
अमर मणि त्रिपाठी की सपा, भाजपा, कांग्रेस और बसपा से नजदीकियां जग जाहिर है ऐसे में आगामी 2027 के चुनाव में टिकट पाने के लिए वह हर हथकंडा अपना रहे हैं। सवाल यह भी है कि नौतनवां विधानसभा सीट पर साल 1980 में भाजपा की स्थापना के बाद अभी तक कमल नहीं खिला। केवल ऋषि त्रिपाठी ही एक ऐसे प्रत्याशी थे जो भाजपा-निषाद गठबंधन पार्टी से लड़कर जीत दोनों बाहुबलियों को धूल चटाने का कार्य किया था। लोगों का कहना है कि यदि ऋषि त्रिपाठी का टिकट काटा गया तो गठबंधन हो या भाजपा से लड़ने वाला कोई भी प्रत्याशी हो चुनाव निश्चित तौर पर हारेगा। क्यों ऋषि त्रिपाठी ने बीते साढ़े चार सालों में नौतनवां विधानसभा क्षेत्र में जो विकास कार्य किए हैं उससे उनके प्रति लोगों का विश्वास जगा है। अभी तक साढे चार साल में उनके ऊपर कोई दाग भी नहीं लगा है। इन सब के बावजूद सपा की उम्मीदवारी रखने वाले पूर्व विधायक कुंवर कौशल उर्फ मुन्ना सिंह का पलड़ा भारी हो सकता है? बीते 2022 के चुनाव में कुंवर कौशल उर्फ मुन्ना सिंह 78 हजार से अधिक मत पाकर दूसरे स्थान पर रहे।चर्चा यह भी है कि कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष विजय सिंह एडवोकेट भी कांग्रेस और सपा गठबंधन से चुनाव लड़ने का मन बना चुके हैं। कांग्रेस सपा गठबंधन में यह सीट कांग्रेस के खाते में जाने की चर्चा है। ऐसे में कुंवर कौशल उर्फ मुन्ना सिंह के सामने एक बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है?