मनोज कुमार त्रिपाठी
लखनऊ! उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रविवार को आरक्षण व्यवस्था और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से जुड़े नियमों के विरोध में सवर्ण मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी 1090 चौराहे पर जुटे और आरक्षण व्यवस्था में बदलाव तथा UGC के नियमों को वापस लेने की मांग उठाई।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं के हाथों में ‘संवैधानिक अछूत’ जैसे संदेश लिखी तख्तियां नजर आईं। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मौजूदा नीतियों में सामान्य वर्ग के हितों की अनदेखी हो रही है। उन्होंने जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा और समान अवसर की व्यवस्था लागू करने की मांग की।

मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़े प्रदर्शनकारी, पुलिस ने रोका
प्रदर्शनकारी 1090 चौराहे से मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने लगे। करीब आधे घंटे के प्रदर्शन के बाद पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। मौके पर पुलिस बल तैनात किया गया और प्रदर्शन को नियंत्रित किया गया।
इससे पहले इसी मुद्दे को लेकर आरक्षण सुधार आंदोलन के प्रतिनिधियों ने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक से मुलाकात कर अपनी मांगें रखी थीं। पाठक ने आंदोलनकारियों की मांगों को केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाने का भरोसा दिया था।
राजभर बोले—‘आरक्षण खत्म करने के पक्ष में नहीं’
वहीं आरक्षण खत्म करने की मांग पर उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अलग रुख सामने रखा। राजभर ने कहा कि वह आरक्षण के समर्थन में हैं। उनके मुताबिक, डॉ. भीमराव आंबेडकर की सोच के अनुसार आरक्षण का उद्देश्य समाज के वंचित तबकों को विकास की मुख्यधारा में लाना था।
राजभर ने यह भी कहा कि आरक्षण केवल किसी एक व्यक्ति या समुदाय के लिए नहीं है और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए भी 10 प्रतिशत EWS आरक्षण का प्रावधान है। केंद्र की आरक्षण व्यवस्था में OBC के लिए 27%, SC के लिए 15%, ST के लिए 7.5% और EWS के लिए 10% आरक्षण का प्रावधान है।
आरक्षण पर सियासी घमासान तेज
लखनऊ में हुए प्रदर्शन और नेताओं के बयानों से साफ है कि आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। एक ओर प्रदर्शनकारी जाति आधारित आरक्षण की समीक्षा और समान अवसर की मांग कर रहे हैं, वहीं राजभर समेत कई नेता आरक्षण को सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने का माध्यम बता रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों की ओर से सोशल मीडिया और प्रदर्शन में सामान्य वर्ग के साथ भेदभाव का दावा करते हुए तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया गया। कुछ नारों में सामान्य वर्ग की तुलना ऐतिहासिक रूप से उत्पीड़ित समुदायों से भी की गई, हालांकि ऐसी तुलना को प्रदर्शनकारियों के राजनीतिक वक्तव्य के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
लखनऊ का यह प्रदर्शन संकेत दे रहा है कि आरक्षण, UGC नियम और समान अवसर का मुद्दा आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में और बड़ा विवाद बन सकता है।

