उमेश चन्द्र त्रिपाठी
लखनऊ! लखनऊ में कस्टम विभाग ने रेलवे के जरिए पहुंचाई जा रही करीब 3 हजार किलो पान मसाले की खेप पकड़ी है। चारबाग में हुई कार्रवाई के दौरान माल को कब्जे में लिया गया। शुरुआती जांच में इसके नेपाल भेजे जाने की आशंका सामने आई है। अब खेप के स्रोत, बुकिंग, संभावित खरीदार, टैक्स भुगतान और पूरे सप्लाई नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है।
जीएसटी विभाग ने लखनऊ में टैक्स चोरी के सिंडिकेट पर बड़ी कार्रवाई की है। चारबाग रेलवे क्षेत्र से करीब तीन हजार किलोग्राम पान मसाले की खेप जब्त की गई। यह माल बिना वैध दस्तावेजों के स्थानीय बाजारों में खपाया जाना था।
बताया जाता है कि जीएसटी विभाग को मुखबिर और गोपनीय सूत्रों से पुख्ता सूचना मिली थी कि रेलवे के जरिए बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी कर पान मसाले की बड़ी खेप लखनऊ पहुंचाई जा रही है। सूचना मिलते ही विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम ने चारबाग स्टेशन व उसके आसपास निगरानी बढ़ाई और मालगाड़ी से उतारे जा रहे करीब 3 हजार किलो पान मसाले को मौके पर ही धर दबोचा। टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पूरे माल को सीज कर अपने कब्जे में ले लिया है। मौके पर मौजूद लोगों से आवश्यक कागजात मांगे गए लेकिन वैध टैक्स इनवॉइस और अनिवार्य ई-वे बिल से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जा सके।
जांच के घेरे में आई RPF और रेलवे कर्मियों की भूमिका
इतनी भारी मात्रा में पान मसाला मालगाड़ी के जरिए लखनऊ तक पहुंच जाने की घटना ने रेलवे सुरक्षा बल यानी RPF और स्टेशन सुरक्षा प्रबंधन पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जीएसटी विभाग अब इस पहलू की भी गहनता से पड़ताल कर रहा है कि रेलवे परिसर, पार्सल यार्ड और मालगाड़ी के लोडिंग-अनलोडिंग स्तर पर इतनी बड़ी खेप की नियमित निगरानी में कहां चूक हुई। सूत्रों के मुताबिक, जांच का दायरा रेलवे पुलिस और स्थानीय कर्मचारियों की संभावित मिलीभगत के एंगल तक पहुंच सकता है।
हालांकि, विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने और पुख्ता साक्ष्य मिलने के बाद ही किसी स्तर पर जिम्मेदारी तय की जाएगी।
जीएसटी विभाग अब बरामद पान मसाले के स्रोत (सोर्स) और लखनऊ में इसके संभावित प्राप्तकर्ता (कंसाइनी) का पूरा नेटवर्क खंगालने में जुटा है। इसके लिए माल की प्रारंभिक बुकिंग, ट्रेन के रूट, परिवहन चालान और संबंधित व्यापारियों के जीएसटीएन (GSTN) रिकॉर्ड की विस्तृत स्क्रूटनी की जा रही है। विभाग यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि इस कंसाइनमेंट पर देय जीएसटी और उपकर (सेस) का भुगतान हुआ था या नहीं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि टैक्स चोरी कर अवैध आपूर्ति करने वाले पूरे सिंडिकेट पर कठोर जुर्माना और विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।


