एक ही परिवार के तीन भाई, तीन सुरक्षा निकायों में बड़े पदों पर; दो भाइयों को मिला उत्कृष्टता सम्मान

नेपाल पुलिस में एसएसपी दिलीप घिमिरे, नेपाली सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल पवन घिमिरे और सशस्त्र पुलिस बल में एसएसपी विकास घिमिरे संभाल रहे हैं अहम जिम्मेदारी

उमेश चन्द्र त्रिपाठी 

काठमांडू! नेपाल के ललितपुर स्थित लेले में रहने वाले घिमिरे परिवार की कहानी सुरक्षा सेवा के प्रति समर्पण और पारिवारिक विरासत की अनूठी मिसाल है। एक ही परिवार के तीन भाई नेपाल के तीन अलग-अलग सुरक्षा निकायों में उच्च पदों पर कार्यरत हैं। बड़े भाई दिलीप घिमिरे नेपाल पुलिस में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी), मंझले भाई पवन घिमिरे नेपाली सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल और छोटे भाई विकास घिमिरे सशस्त्र पुलिस बल में एसएसपी हैं।

इस परिवार की खास बात यह भी है कि दो भाइयों को एक ही वर्ष में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। परिवार की कई अन्य सदस्य भी पुलिस और सुरक्षा सेवाओं से जुड़े हैं, जिससे घिमिरे परिवार की पहचान सुरक्षा सेवा के प्रति समर्पण रखने वाले परिवार के रूप में बनी है।

तीन भाई, तीन सुरक्षा निकाय और अलग-अलग जिम्मेदारियां

दिलीप घिमिरे वर्तमान में जिला पुलिस परिसर, काठमांडू का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2001 में पुलिस निरीक्षक के रूप में नेपाल पुलिस में प्रवेश किया था।

वहीं, छोटे भाई विकास घिमिरे सशस्त्र पुलिस बल के कुरिनटार स्थित आपदा प्रशिक्षण निदेशालय के प्रमुख हैं। उन्होंने वर्ष 2002 में निरीक्षक के पद पर सशस्त्र पुलिस बल में सेवा शुरू की थी।

मंझले भाई पवन घिमिरे नेपाली सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल हैं। उन्होंने वर्ष 1999 में सेकंड लेफ्टिनेंट के रूप में सेना में प्रवेश किया था।

तीनों भाई अलग-अलग सुरक्षा संगठनों में रहते हुए देश की सेवा कर रहे हैं। परिवार की इस परंपरा को आगे बढ़ाने में उनकी पत्नियों की भूमिका भी उल्लेखनीय है। दिलीप घिमिरे की पत्नी वसुंधरा खड़का नेपाल पुलिस में एसपी हैं और वर्तमान में जिला पुलिस कार्यालय, झापा की प्रमुख हैं। वहीं, विकास घिमिरे की पत्नी डॉ. समृद्धि बस्नेत सशस्त्र पुलिस अस्पताल में चिकित्सक के रूप में कार्यरत हैं।

एक ही साल दो भाइयों को मिला उत्कृष्टता सम्मान

घिमिरे परिवार की चर्चा का एक प्रमुख कारण यह है कि नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल में कार्यरत दोनों भाइयों को एक ही वर्ष में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया।

वर्ष 2022 में दिलीप घिमिरे को जिला पुलिस कार्यालय, इलाम का नेतृत्व करते समय पुलिस दिवस पर उत्कृष्ट पुलिस अधिकारी के रूप में पुरस्कृत किया गया था। इसी वर्ष उनके छोटे भाई विकास घिमिरे को दक्षिणकाली गण में कार्यरत रहने के दौरान सशस्त्र पुलिस बल के वार्षिक निरीक्षण के अवसर पर उत्कृष्टता का सम्मान मिला।

दोनों भाइयों की जिम्मेदारियां और कार्यक्षेत्र अलग-अलग हैं, लेकिन उनकी उपलब्धियों ने एक ही परिवार को विशेष पहचान दिलाई।

जिला पुलिस कार्यालय की जिम्मेदारी में शांति-सुरक्षा बनाए रखना, अपराधों की जांच, पुलिस बल का संचालन और आम नागरिकों को सेवाएं उपलब्ध कराना शामिल है। वहीं, सशस्त्र पुलिस बल की आपदा प्रशिक्षण इकाई बाढ़, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों के लिए जनशक्ति को प्रशिक्षित करने में अहम भूमिका निभाती है।

इलाम के बाद दिलीप घिमिरे रौतहट जिला पुलिस प्रमुख की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।

दिलीप घिमिरे कहते हैं, “हमारा परिवार ही देश और जनता की सेवा में समर्पित है। यह हमारे लिए खुशी की बात है, लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों के कारण परिवार के सभी सदस्यों से अक्सर मुलाकात नहीं हो पाती, जिसका दुख भी रहता है।”

प्रथम विश्व युद्ध तक पहुंचती है परिवार की विरासत

घिमिरे परिवार का सुरक्षा सेवाओं से संबंध मौजूदा पीढ़ी तक सीमित नहीं है। इसकी जड़ें पिछली पीढ़ियों तक जाती हैं।

परिवार के दादा जीत बहादुर घिमिरे प्रथम विश्व युद्ध के समय नेपाली सेना में कैप्टन थे। पारिवारिक विवरण के अनुसार, उन्होंने ब्रिटिश पक्ष की ओर से लड़ने के लिए बर्मा गए नेपाली सैनिकों का नेतृत्व किया था।

उस समय नेपाली सैनिक ब्रिटिश साम्राज्य के सैन्य अभियानों में शामिल होते थे। इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में जीतबहादुर घिमिरे ने सेना में अपनी सेवाएं दी थीं।

उनके बाद की पीढ़ियों में सुरक्षा सेवाओं से जुड़ने की यह परंपरा आगे बढ़ी। आज परिवार के सदस्य नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।

विकास घिमिरे के अनुसार, परिवार की पृष्ठभूमि ने उन्हें सुरक्षा सेवा की ओर प्रेरित किया। वह बताते हैं कि सबसे पहले बड़े भाई दिलीप नेपाल पुलिस में भर्ती हुए, फिर मंझले भाई पवन नेपाली सेना में सेकंड लेफ्टिनेंट बने और बाद में उन्होंने स्वयं सशस्त्र पुलिस बल में निरीक्षक के रूप में सेवा शुरू की।

उनके मुताबिक, सुरक्षा निकाय में अधिकारी होना केवल करियर बनाने तक सीमित नहीं है। इसमें अनुशासन, जिम्मेदारी, संगठन के प्रति प्रतिबद्धता और अधीनस्थ कर्मचारियों का नेतृत्व करना भी शामिल है।

ड्यूटी के कारण छह महीने तक नहीं हो पाती मुलाकात

सुरक्षा सेवाओं में कार्यरत लोगों के लिए परिवार को समय देना अक्सर चुनौतीपूर्ण होता है। घिमिरे परिवार भी इससे अछूता नहीं है।

विकास घिमिरे कुरिनटार में तैनात हैं, जबकि उनकी पत्नी डॉ. समृद्धि बस्नेत बलंबू स्थित सशस्त्र पुलिस अस्पताल में कार्यरत हैं। अलग-अलग कार्यस्थलों और जिम्मेदारियों के कारण कई बार दोनों को लंबे समय तक मिलने का अवसर नहीं मिलता।

विकास बताते हैं कि कभी-कभी छह महीने तक भी उनकी और पत्नी की मुलाकात नहीं हो पाती। सुरक्षा सेवाओं में त्योहारों के दौरान भी तत्काल छुट्टी मिलना आसान नहीं होता, इसलिए परिवार के सभी सदस्यों का एक साथ जुटना मुश्किल हो जाता है।

विकास और समृद्धि की मुलाकात का रिश्ता भी सेवा के दौरान ही आगे बढ़ा था। विकास बताते हैं कि समृद्धि से विवाह का निर्णय परिवार ने सहजता से स्वीकार किया, क्योंकि वह भी सुरक्षा सेवा से जुड़ी थीं।

माता-पिता के बिना अधूरी रह गई खुशियां

घिमिरे परिवार के लिए उपलब्धियों के साथ एक भावुक पक्ष भी जुड़ा है। तीनों भाइयों के माता-पिता ने उन्हें कठिन परिस्थितियों में पाला-पोसा और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। हालांकि, जब उनके बेटे उच्च पदों तक पहुंचे और उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित हुए, तब माता-पिता उनके साथ खुशियां साझा करने के लिए मौजूद नहीं थे।

विकास घिमिरे इस बात को याद करते हुए भावुक हो जाते हैं। उनका कहना है कि माता-पिता ने कठिन परिश्रम से बच्चों को बड़ा किया और आज पूरा परिवार देश तथा जनता की सुरक्षा में समर्पित है, लेकिन सफलता और खुशी के इन पलों में माता-पिता की कमी हमेशा महसूस होती है।

वह बताते हैं कि विशेष रूप से त्योहारों के समय परिवार के मुखिया की अनुपस्थिति अधिक खलती है।

विरासत के साथ अपनी जिम्मेदारी भी

घिमिरे परिवार की कहानी केवल तीन भाइयों के अलग-अलग सुरक्षा निकायों में बड़े पदों पर पहुंचने की कहानी नहीं है। यह पीढ़ियों से चली आ रही सेवा-परंपरा, व्यक्तिगत मेहनत और अलग-अलग जिम्मेदारियों के बीच देश के प्रति प्रतिबद्धता की भी कहानी है।

एक ही परिवार के सदस्य सेना, नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल और संबंधित स्वास्थ्य सेवा में कार्यरत हैं। दो भाइयों को एक ही वर्ष उत्कृष्टता का सम्मान मिलना इस परिवार के लिए विशेष उपलब्धि है।

यह अनूठा संयोग दिखाता है कि पारिवारिक विरासत प्रेरणा दे सकती है, लेकिन अपने-अपने संगठन में जिम्मेदारी निभाना और उपलब्धियां हासिल करना व्यक्तिगत प्रयास, अनुशासन तथा समर्पण पर निर्भर करता है।

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