पुस्तक समीक्षा गोष्ठी में “नाथपंथ का इतिहास” पर गहन मंथन

उमेश चन्द्र त्रिपाठी

गोरखपुर! महायोगी श्री गुरु गोरक्षनाथ शोध पीठ के पुस्तकालय एवं अथर्व पब्लिकेशन, गोरखपुर के संयुक्त तत्वावधान में “पुस्तक समीक्षा गोष्ठी” का आयोजन किया गया। इस अवसर पर डॉ. पद्मजा सिंह कृत पुस्तक “नाथपंथ का इतिहास” पर विद्वानों द्वारा गहन समीक्षा एवं विचार-विमर्श प्रस्तुत किया गया।

कार्यक्रम का प्रारंभ अथर्व पब्लिकेशन के निदेशक डॉ. अभिषेक कुमार शर्मा द्वारा विषय स्थापना के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने नाथ परंपरा के अध्ययन की| समकालीन आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

मुख्य वक्ता डॉ. प्रत्यूष दुबे ने नाथ पंथ, नाथ साहित्य एवं उसके ऐतिहासिक विकास पर विस्तार से विचार रखते हुए कहा कि गोरखनाथ का काल सामाजिक चुनौतियों के बीच संतुलन एवं आत्मचिंतन का काल था, जिसमें योग और समरसता की विशेष भूमिका रही।

पुस्तक की लेखिका डॉ. पद्मजा सिंह ने अपने वक्तव्य में नाथ पंथ की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए इसे सिंधु घाटी सभ्यता एवं वैदिक परंपरा से जोड़ते हुए गुरु गोरखनाथ द्वारा इसके संगठित स्वरूप की स्थापना का उल्लेख किया।

अध्यक्षता कर रहे डॉ. फूलचंद गुप्त ने पुस्तक का समीक्षात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए वर्तमान संदर्भ में नाथ पंथ की प्रासंगिकता एवं उसके सामाजिक प्रभाव को रेखांकित किया। उन्होंने नेपाल सहित अन्य क्षेत्रों में गोरखनाथ के प्रभाव का उल्लेख करते हुए इसके व्यापक विस्तार की ओर संकेत किया।

गोष्ठी में उपस्थित शोधार्थियों ने नाथ पंथ से संबंधित विविध जिज्ञासाएं प्रस्तुत कीं, जिनका विद्वानों ने समाधान किया। इस दौरान नाथ पंथ की समकालीन प्रासंगिकता, भारतीय समाज पर उसका प्रभाव एवं उसके धार्मिक-सामाजिक आयामों पर सारगर्भित चर्चा हुई।

कार्यक्रम में यशवंत सिंह यादव एवं आशीष उपाध्याय ने भी अपने विचार व्यक्त किए। अंत में शोधपीठ के पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार द्विवेदी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. हर्षवर्धन सिंह एवं डॉ. सुनील कुमार ने संयुक्त रूप से किया।

इस अवसर पर शिवेंद्र मणि, नीतेश पाण्डेय, अमर हिंदुस्तानी, रोहन मिश्र, उज्जवल उजाला,संजना पटेल, वसुंधरा वासु, पूजा यादव, सहित साहित्य साधना की पूरी टीम उपस्थित रही।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *