मनोज कुमार त्रिपाठी
महराजगंज। करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित कोटई माता मंदिर परिसर में जलभराव की स्थिति सामने आने के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि लगभग 2 करोड़ 44 लाख रुपये की लागत से कराए गए निर्माण कार्य के बावजूद मंदिर परिसर बारिश के पानी से भर गया, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर परिसर में जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं की गई, जिसके कारण बारिश का पानी परिसर में जमा हो रहा है। वहीं निर्माण कार्य में कथित अनियमितताओं को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में जिला पंचायत राज अधिकारी श्रेया मिश्रा द्वारा एक अन्य मामले में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर ग्राम पंचायत अधिकारी अवधेश यादव को प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर निलंबित किए जाने की कार्रवाई की गई थी। इसके बाद ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर निर्माण कार्य में लगाए जा रहे आरोपों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों में निर्माण कार्य से जुड़े कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की गई है। आरोपों के दायरे में संजय श्रीवास्तव तथा राहुल यादव के नाम भी लिए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
इसके साथ ही ग्रामीणों ने मांग की है कि मंदिर निर्माण कार्य में शामिल ठेकेदार हरिनंदन उपाध्याय तथा संबंधित कार्य एजेंसियों और फर्मों की भी निष्पक्ष तकनीकी और वित्तीय जांच कराई जाए। लोगों का कहना है कि निर्माण की गुणवत्ता, भुगतान प्रक्रिया और कार्य आवंटन की विस्तृत जांच आवश्यक है।
मामले को लेकर जब जिलाधिकारी महराजगंज से संपर्क किया गया तो उनके कार्यालय से बताया गया कि प्रकरण प्रशासन के संज्ञान में है तथा जांच के लिए समिति गठित की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब सबकी निगाहें प्रस्तावित जांच पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या जांच में करोड़ों रुपये के निर्माण कार्य की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी और यदि अनियमितताएं पाई जाती हैं तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी। इसका जवाब आने वाला समय और जांच रिपोर्ट ही दे पाएगी।