नेपाल राज दरबार हत्या काण्ड की दोबारा जांच होगी?

जांच को लेकर गृहमंत्री सुदन गुरुंग ने दिया बड़ा संकेत

उमेश चन्द्र त्रिपाठी 

काठमांडू, 13 जून 2026 ! नेपाल की राजनीति में एक बार फिर गृहमंत्री सुदन गुरुंग ने दूसरी बार पदभार संभालने के बाद 01 जून 2001 को ऐतिहासिक नेपाल शाही दरबार हत्या काण्ड की जांच को लेकर बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो राजा वीरेन्द्र और उनके परिवार की हत्या से जुड़े घटनाक्रम की पुनः जांच कराई जा सकती है।

सुदन गुरुंग ने पहली बार 27 मार्च 2026 को गृहमंत्री पद की शपथ ली थी। हालांकि, पद संभालने के एक महीने के भीतर ही उन पर शेयर निवेश, संपत्ति के स्रोत और कारोबारी संबंधों को लेकर सवाल उठने लगे। बढ़ते विवाद के बीच उन्होंने 22 अप्रैल 2026 को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए गृहमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।

इस्तीफे के बाद नेपाल सरकार ने उनके खिलाफ लगे आरोपों की जांच के लिए पूर्व उच्च न्यायालय न्यायाधीश अच्युत प्रसाद भण्डारी के नेतृत्व में एक जांच समिति बनाई। समिति को आरोपों, शेयर निवेश और संपत्ति के स्रोतों की जांच का जिम्मा दिया गया था।

जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री बालेन शाह को सौंप दी। रिपोर्ट में गुरुंग की संपत्तियों और निवेशों में कोई ठोस अनियमितता नहीं मिलने तथा अधिकांश आरोपों की पुष्टि न होने की बात कही गई। इसके बाद उनके दोबारा गृहमंत्री बनने का रास्ता साफ हुआ।

पुनर्नियुक्ति के बाद गृहमंत्री गुरुंग ने कहा कि नेपाल के इतिहास की कई महत्वपूर्ण घटनाओं के बारे में जनता अब भी जवाब चाहती है। इसी क्रम में उन्होंने वर्ष 2001 के राजदरबार हत्या काण्ड का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि कानूनी और संवैधानिक आधार मिले तो उस मामले की भी पुनः समीक्षा और जांच पर विचार किया जा सकता है।

ज्ञात हो कि 1 जून 2001 को नारायणहिटी दरबार में हुए गोली काण्ड में तत्कालीन राजा वीरेन्द्र वीर विक्रम शाह, रानी ऐश्वर्या सहित शाही परिवार के 09 सदस्य मारे गए थे। यह घटना आज भी नेपाल के इतिहास की सबसे रहस्यमयी और चर्चित घटनाओं में गिनी जाती है।

गृहमंत्री गुरुंग के इस बयान के बाद नेपाल की राजनीति और सोशल मीडिया में बहस तेज हो गई है। कुछ लोग इसे सत्य की खोज की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि इतने वर्षों बाद मामले को फिर से खोलना राजनीतिक बहस को जन्म दे सकता है।

अब देखना यह होगा कि सरकार वास्तव में इस ऐतिहासिक मामले की पुनः जांच के लिए कोई औपचारिक प्रक्रिया शुरू करती है या नहीं।

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