वर्षों से विवादों में मर्चाहे बाबा मंदिर की जमीन
पुराने रिकॉर्ड फिर बने चर्चा का विषय
रिपोर्ट: मनोज कुमार त्रिपाठी
द इंडिया एक्सप्रेस न्यूज़
नौतनवा, महराजगंज। नौतनवा स्थित ऐतिहासिक मर्चाहे बाबा मंदिर (कुटी) की भूमि का विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। स्थानीय समाजसेवियों और मंदिर से जुड़े लोगों का आरोप है कि मंदिर की बेशकीमती जमीन पर वर्षों से कथित अवैध कब्जा बना हुआ है, लेकिन तमाम शिकायतों और आंदोलनों के बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं निकल सका।
इस मुद्दे को लेकर पुराने अखबारों की कतरनें भी फिर चर्चा में आ गई हैं। इनमें बताया गया है कि मंदिर के महंत ज्ञानदास ने कथित अवैध कब्जे के विरोध में अस्पताल चौराहे पर आमरण अनशन तक किया था। उस समय विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने भी उनके आंदोलन को समर्थन दिया था। तत्कालीन प्रशासन ने पैमाइश और कार्रवाई का आश्वासन देकर अनशन समाप्त कराया था।

पुराने समाचारों में यह भी उल्लेख मिलता है कि विवादित भूमि पर कब्जे के प्रयास को लेकर प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा था। मौके पर पुलिस बल तैनात किया गया था और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए एसडीएम की ओर से विवादित भूमि को लेकर नोटिस भी जारी किए गए थे। कुछ मामलों में भूमि विवाद न्यायालय तक भी पहुंचा था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों बीत जाने के बाद भी यदि मंदिर की भूमि आज भी विवादों में है, तो यह प्रशासनिक कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उनका आरोप है कि प्रभावशाली लोगों के कारण मंदिर की संपत्ति को पूरी तरह कब्जा मुक्त नहीं कराया जा सका।

स्थानीय नागरिकों का यह भी कहना है कि इतने लंबे समय से विवाद और शिकायतें सामने आने के बावजूद तहसील प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई स्पष्ट पहल या सार्वजनिक प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिल रही है। लोगों का सवाल है कि जब मंदिर की भूमि से जुड़े पुराने अभिलेख, शिकायतें और विवाद पहले से मौजूद हैं, तो आखिर राजस्व विभाग और तहसील प्रशासन इस मामले में सक्रियता क्यों नहीं दिखा रहा। उनका मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई और स्पष्ट स्थिति सामने रखी जाती, तो यह मामला बार-बार विवादों में नहीं आता।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वर्षों पुराने इस विवाद का स्थायी समाधान होगा? क्या मंदिर की भूमि का सीमांकन कर उसे पूरी तरह सुरक्षित कराया जाएगा? क्या कथित अवैध कब्जों को हटाने के लिए प्रशासन कोई ठोस कार्रवाई करेगा? और आखिर तहसील प्रशासन इस पूरे प्रकरण पर अब तक मौन क्यों है? या फिर यह मामला हर कुछ वर्षों बाद फिर सुर्खियों में आता रहेगा?
फिलहाल स्थानीय लोगों की निगाहें तहसील प्रशासन और जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।