नौकरी करने नहीं आती तो अपने-अपने पद से इस्तीफा दे दें- हाईकोर्ट 

उत्तर प्रदेश के सभंल में तैनात डीएम-एसपी को हाईकोर्ट की सलाह 

16 मार्च को इस मामले की अगली सुनवाई होगी 

उमेश चन्द्र त्रिपाठी 

लखनऊ! उत्तर प्रदेश के संभल जिले में तैनात डीएम और एसपी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सलाह दी है कि नौकरी करनी नहीं आती है तो अपने-अपने पद से इस्तीफा दे दें। 

मामला एक मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित करने के प्रशासनिक आदेश से जुड़ा है। पुलिस ने फरमान जारी किया था कि मस्जिद में एक बार में 5 से 6 लोग ही नमाज पढ़ें। 

पुलिस के इस फरमान के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की गई। अपील करने वाले और सरकार के वकील की दलील सुनने के बाद जज ने संभल के डीएम और एसपी को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा “प्रशासन मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित नहीं कर सकता। अगर डीएम राजेंद्र पेंसिया और एसपी केके विश्नोई को लगता है कि वे कानून व्यवस्था नहीं संभाल पा रहे, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। या फिर ट्रांसफर करवा लेना चाहिए। हर परिस्थिति में कानून व्यवस्था बनाए रखना उनका काम है।”

जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने कहा-

“यह राज्य का कर्तव्य है कि वह सुनिश्चित करे कि हर समुदाय निर्धारित पूजा स्थल पर शांतिपूर्वक पूजा कर सके। अगर वह निजी संपत्ति है, तो राज्य से किसी इजाजत की जरूरत नहीं। कोर्ट पहले ही साफ कर चुका है कि राज्य का दखल सिर्फ वहीं जरूरी है, जहां प्रार्थना या धार्मिक काम सार्वजनिक भूमि पर आयोजित किए जाने हों।”

याचिकाकर्ता मुनाजिर खान के मुताबिक, पिछले साल फरवरी महीने में हयातनगर थाने से पुलिसवाले आए। उन्होंने कहा कि सिर्फ 20 लोग ही मस्जिद में नमाज पढ़ सकते हैं। एक बार में 5-6 लोग ही नमाज अदा करें।

इसके बाद मुनाजिर ने 18 जनवरी, 2026 को हाईकोर्ट में याचिका दायर की। 27 फरवरी को पहली सुनवाई हुई। शनिवार आदेश हाईकोर्ट की साइट पर अपलोड हुआ। अब 16 मार्च को इस मामले की अगली सुनवाई होगी।

अपील में कहा गया, रमजान के दौरान मस्जिद में नमाज अदा करने से रोका जा रहा। रमजान चल रहा है। ऐसे में परिसर के भीतर नमाज अदा करने के लिए बड़ी संख्या में लोग आ सकते हैं।

सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने नमाजियों की संख्या सीमित करने का आदेश दिया था। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने सरकार के वकील के तर्क को खारिज कर दिया।

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