अधिकारी-कर्मचारियों ने साधी चुप्पी, आखिर कैसा मेल-जोल चल रहा? अब ये कौन बताएगा!
SSP PO का कहना—“जो भी गलती हुई है, उसे स्वीकार किया जाता है”, लेकिन फोन पर पक्ष जानने की कोशिश हुई तो नहीं हो पाया संवाद
पीपीगंज, गोरखपुर। पीपीगंज पोस्ट ऑफिस से जुड़े मामले में आरोपों की परतें लगातार सामने आ रही हैं। हनुमान नगर वार्ड नंबर-2 निवासी मीना गुप्ता ने अपने खाते से कथित तौर पर ₹2 लाख की निकासी, पासबुक और खाताधारिका के नाम से जुड़े बदलाव तथा जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
मीना गुप्ता के मुताबिक, उन्होंने वर्ष 2015 में पीपीगंज पोस्ट ऑफिस में खाता खुलवाया था। उनका आरोप है कि 10 अप्रैल 2026 को पैसे निकालने पहुंचने पर उन्हें जानकारी हुई कि उनके खाते से 7 फरवरी 2026 को ₹2 लाख की निकासी हो चुकी है।
न्यायालय में दी गई शिकायत में मीना ने आरोप लगाया है कि उनके नाम से मिलते-जुलते नाम वाली दूसरी महिला के जरिए कथित तौर पर रकम निकाली गई और KYC से जुड़े दस्तावेजों के माध्यम से खाते और रकम को दूसरी महिला से जोड़ने की प्रक्रिया की गई।
पासबुक से लेकर पूरी फाइल तक सवाल
पीड़िता का आरोप है कि मामला सिर्फ ₹2 लाख की कथित निकासी तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, पासबुक में बदलाव, खाताधारिका के नाम में बदलाव और अब पूरी फाइल बदलने की बात सामने आ रही है।
सबसे बड़ा सवाल जांच रिपोर्ट को लेकर है। मीना गुप्ता का आरोप है कि पूरी जांच किए बिना फाइल में आधी-अधूरी बातें दर्ज कर रिपोर्ट लगा दी गई, जबकि कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की पड़ताल नहीं हुई।
SSP PO ने माना—गलती हुई तो स्वीकार करेंगे
मीना गुप्ता के अनुसार, वह SSP PO कार्यालय पहुंचीं और अपनी शिकायत अधिकारियों के सामने रखी। उनका कहना है कि SSP PO ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि “जो भी गलती हुई है, उसे स्वीकार किया जाता है” और जांच के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, मामले में संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष जानने के लिए फोन पर बातचीत करने का प्रयास किया गया, लेकिन संवाद स्थापित नहीं हो सका।
अब अधिकारी-कर्मचारियों की चुप्पी पर सवाल
₹2 लाख की कथित निकासी, दस्तावेजों में बदलाव और जांच रिपोर्ट को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने के बावजूद अब यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी पूरे मामले पर खुलकर जवाब कब देंगे?
क्या पुराने और नए दस्तावेजों का मिलान होगा?
क्या KYC रिकॉर्ड और निकासी दस्तावेजों की जांच होगी?
क्या पहली जांच रिपोर्ट की दोबारा समीक्षा होगी?
और अगर गलती सामने आती है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
आखिर कैसा मेल-जोल चल रहा है और इस पूरे मामले की असली सच्चाई क्या है—अब यह कौन बताएगा?
फिलहाल पीड़िता न्याय और अपनी रकम वापस मिलने की उम्मीद लगाए बैठी हैं। अब निगाहें दोबारा होने वाली जांच और उसके निष्कर्ष पर टिकी हैं।