अपनों की तलाश में भटकते चेहरे और आंखों में आंसू… नेपाल की बाढ़ ने इंसानियत को झकझोर दिया
दिलीप त्रिपाठी
नेपाल में आई भीषण बाढ़ और प्राकृतिक आपदा ने हालात को बेहद भयावह बना दिया है। तबाही का असर अब भारत के सीमावर्ती इलाकों तक दिखाई देने लगा है। नेपाल में लगातार बारिश और बाढ़ के चलते गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से बिहार के बेतिया समेत निचले इलाकों में हलचल बढ़ गई है। प्रशासन ने एहतियातन निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है। साथ ही प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ाकर लोगों से सतर्क रहने की अपील की जा रही है!


वहीं नेपाल में बाढ़ की त्रासदी के बीच राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। काठमांडू से प्रभावित क्षेत्रों की ओर राहत सामग्री भेजी जा रही है। भारत की ओर से भेजी गई सहायता सामग्री भी जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाई जा रही है। भोजन, आवश्यक सामान और अन्य राहत सामग्री के जरिए बाढ़ प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाने का प्रयास जारी है।
लेकिन इस प्राकृतिक आपदा की सबसे दर्दनाक तस्वीर उन परिवारों के चेहरों पर दिखाई दे रही है, जिन्होंने अपने अपनों को खो दिया है या जिनका अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। काठमांडू स्थित त्रिभुवन विश्वविद्यालय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिन के मुर्दाघर में लापता लोगों के परिजन लगातार पहुंच रहे हैं। हर चेहरा एक उम्मीद लिए वहां पहुंचता है—शायद कोई खबर मिले, शायद कोई अपना मिल जाए।

किसी मां की आंखें अपने बच्चे को तलाश रही हैं, किसी परिवार की उम्मीद किसी एक फोन कॉल पर टिकी है तो कोई अपनों की पहचान की खबर सुनने से डर रहा है। बाढ़ के पानी ने सिर्फ घर और रास्ते ही नहीं बहाए, बल्कि कई परिवारों की खुशियां और उनकी जिंदगी का सहारा भी छीन लिया।
इस बीच भारत ने नेपाल के मुश्किल वक्त में एक बार फिर मजबूती से साथ खड़े होने का भरोसा दिलाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत नेपाल के साथ खड़ा है और राहत सामग्री लगातार भेजी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से भी नेपाल को हर जरूरी सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया है।

नेपाल की धरती पर जहां राहत दल जिंदगी बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं, वहीं सीमा पार बिहार में बढ़ता गंडक का जलस्तर प्रशासन के लिए नई चुनौती बनता जा रहा है। हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।
यह आपदा सिर्फ पानी की तबाही की कहानी नहीं है—यह उन बिछड़े परिवारों की कहानी है, जिनकी आंखें आज भी अपने किसी अपने के लौट आने की राह देख रही हैं।
समय कब किसकी जिंदगी बदल दे, कोई नहीं जानता। ऐसे वक्त में इंसानियत ही सबसे बड़ा सहारा है। नेपाल की इस भयावह त्रासदी के बीच सामने आ रहे मासूम चेहरों, रोते परिवारों और अपनों की तलाश में भटकते लोगों की तस्वीरें हर संवेदनशील इंसान को भीतर तक झकझोर रही हैं। ईश्वर करे, ऐसी भयावह त्रासदी का सामना किसी परिवार को कभी न करना पड़े।


