मनोज कुमार त्रिपाठी
मंगलापुर। मंगलापुर में चल रही जांच के बीच ग्राम विकास अधिकारी उमेश यादव पर शिकायतकर्ता हरिशंकर को कथित तौर पर 5 लाख रुपये लेकर मामला रफा-दफा करने की बात कहने का गंभीर आरोप सामने आया है। शिकायतकर्ता हरिशंकर का दावा है कि ग्राम विकास अधिकारी की ओर से उन्हें कथित तौर पर कहा गया कि “5 लाख ले लो और मामला रफा-दफा करो।”
हरिशंकर के मुताबिक, जांच से जुड़े मामले को खत्म करने के लिए उन्हें कथित तौर पर पांच लाख रुपये लेने की बात कही गई। उनका आरोप है कि इस तरह मामले को आगे बढ़ाने के बजाय समझौते के जरिए खत्म करने का प्रयास किया गया।,
शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने मामले में सामने आई कथित अनियमितताओं को लेकर शिकायत की है और वह चाहते हैं कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो। उनका आरोप है कि जांच के दौरान मामले को समाप्त कराने के लिए उन्हें 5 लाख रुपये लेने की पेशकश की गई।
ग्राम विकास अधिकारी ने आरोपों से किया इनकार
वहीं, जब ग्राम विकास अधिकारी उमेश यादव से इन आरोपों को लेकर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने आरोपों को पूरी तरह गलत बताया। उमेश यादव ने कहा कि उन्होंने हरिशंकर से न तो ऐसी कोई बात कही और न ही उनसे इस तरह की कोई बातचीत हुई।
उमेश यादव का कहना है कि यदि उनके ऊपर इस प्रकार का गंभीर आरोप लगाया जा रहा है तो उसके समर्थन में प्रमाण भी सामने आने चाहिए। उन्होंने खुद पर लगाए गए रिश्वत संबंधी आरोपों से साफ इनकार किया है।
हरिशंकर ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग
शिकायतकर्ता हरिशंकर अपने आरोपों पर कायम हैं। उनका कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए और कथित तौर पर 5 लाख रुपये लेकर मामला खत्म करने की बात कहे जाने के आरोप की भी जांच होनी चाहिए।
मामले में जांच रिपोर्ट को लेकर भी शिकायतकर्ता की ओर से गंभीर दावे किए गए हैं। उनका कहना है कि जांच के दौरान अधिकारी और कर्मचारियों से जुड़ी अनियमितताओं के तथ्य सामने आए हैं, लेकिन अभी तक कार्रवाई नहीं हुई है।
अब एक ओर शिकायतकर्ता हरिशंकर 5 लाख रुपये लेकर मामला रफा-दफा करने की कथित पेशकश का आरोप लगा रहे हैं, जबकि ग्राम विकास अधिकारी उमेश यादव इसे पूरी तरह नकार रहे हैं।
ऐसे में पूरे मामले की सच्चाई निष्पक्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी। अब निगाहें जांच रिपोर्ट और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।


