14 गोलियां खाकर भी नहीं टूटा हौसला, देवेन्द्र राज कंडेल ‘मुन्ना बाबू’ की जिंदगी को बताया ‘बोनस की जिंदगी’

उमेश चन्द्र त्रिपाठी 

नवलपरासी महेशपुर नेपाल! नेपाली कांग्रेस के नेता एवं पूर्व गृह राज्यमंत्री देवेन्द्र राज कंडेल, जिन्हें समर्थक और करीबी लोग प्यार से ‘मुन्ना बाबू’ कहते हैं, इन दिनों एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए फिर चर्चा में हैं। पोस्ट में कंडेल के राजनीतिक जीवन, संघर्ष, निष्ठा और उस जानलेवा हमले का जिक्र किया गया है, जिसमें माओवादी हमलावरों ने उन पर कथित तौर पर 14 गोलियां चलाई थीं।

पोस्ट में उनकी जिंदगी को ‘नफे की जिंदगी’ और ‘बोनस की जिंदगी’ बताते हुए कहा गया है कि यह बोनस किसी पद, पैसे या संपत्ति का नहीं, बल्कि देश और जनता की सेवा के लिए मिला अतिरिक्त जीवन है।

पोस्ट के मुताबिक, करीब 23 वर्ष पहले नेपाल में सशस्त्र द्वंद्व के दौर में तत्कालीन गृहमंत्री खुम बहादुर खड़का के बीमार होने के बाद देवेन्द्र राज कंडेल ने गृह मंत्रालय का कार्यभार संभाला था। उस समय माओवादी विद्रोह के खिलाफ सरकार की सख्त कार्रवाई के बीच कंडेल को भी निशाना बनाया गया।

ललितपुर स्थित अपने डेरा से निकलते समय उन पर माओवादी हमलावरों ने कथित रूप से 14 गोलियां चलाईं। हमले में उनकी गाड़ी के शीशे छलनी हो गए और वह गंभीर रूप से घायल हुए। पोस्ट में दावा किया गया है कि आज भी उनके शरीर में छह गोलियों के टुकड़े मौजूद हैं।

हमले के बाद कंडेल के कथित बयान “मैं मरा नहीं, अब तो जीने की आशा आई” को भी पोस्ट में याद किया गया है। उनके समर्थकों का कहना है कि इतनी गंभीर घटना के बावजूद उन्होंने राजनीति से पीछे हटने के बजाय जनसेवा का रास्ता जारी रखा।

सोशल मीडिया पोस्ट में यह भी दावा किया गया है कि विदेश में इलाज के लिए तीन बार जाने के बावजूद उन्होंने सरकार से उपचार खर्च के नाम पर कोई राशि नहीं मांगी और अपना इलाज स्वयं कराया। साथ ही, क्षेत्र में जरूरतमंदों की मदद और सामाजिक कार्यों में उनके योगदान का भी उल्लेख किया गया है।

पोस्ट में कंडेल परिवार की राजनीतिक और सामाजिक विरासत का भी जिक्र है। उनके पिता स्वर्गीय पृथ्वीराज कंडेल 2015 साल के सांसद रहे थे। परिवार के अन्य सदस्यों के सामाजिक और शैक्षणिक योगदान को भी इस पोस्ट में प्रमुखता से सामने रखा गया है।

देवेन्द्रराज कंडेल के राजनीतिक सफर की बात करें तो पोस्ट के अनुसार वह नेपाली कांग्रेस के दो बार केंद्रीय सदस्य रह चुके हैं और पार्टी के सहकारी विभाग के केंद्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।

हालांकि, सोशल मीडिया पोस्ट में किए गए दावों और घटनाओं के सभी विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि इस पोस्ट के आधार पर नहीं की गई है। पोस्ट ने फिलहाल कंडेल के समर्थकों के बीच उनके संघर्ष, निष्ठा और राजनीतिक जीवन को लेकर चर्चा जरूर तेज कर दी है।

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