पुरैनिहा ग्राम पंचायत में PM आवास योजना पर गंभीर सवाल, जांच में 25 लाभार्थी अपात्र मिले

40 आवास स्वीकृत, 39 लाभार्थियों के खातों में पहली किस्त से जुड़ी अनियमितता का उल्लेख; अपात्र लाभार्थियों से धनराशि वापस कराने की कार्रवाई

मनोज कुमार त्रिपाठी 

महराजगंज/नौतनवा। नौतनवा विकासखंड की ग्राम पंचायत पुरैनिहा में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर सामने आए सरकारी दस्तावेजों ने योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्ष 2023 में जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज शिकायत के बाद हुई विभागीय जांच में 40 प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत होने और 39 लाभार्थियों के खातों में पहली किस्त की धनराशि निर्धारित राशि से अधिक होने का उल्लेख सरकारी पत्र में किया गया है।

दस्तावेज के अनुसार, शिकायत की जांच खंड विकास अधिकारी नौतनवा/सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) स्तर से कराई गई। जांच में 25 लाभार्थियों को अपात्र पाए जाने का उल्लेख है। इसके बाद अपात्र लाभार्थियों के खातों से धनराशि वापस कराने की कार्रवाई किए जाने तथा तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारी दिनेश राय को प्रतिकूल प्रविष्टि दिए जाने की बात विभागीय पत्र में दर्ज है।

शिकायत में लगाए गए थे गंभीर आरोप

जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज शिकायत में आरोप लगाया गया था कि प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों से कथित तौर पर धनराशि लेकर आवास आवंटित किए गए। शिकायत के आधार पर स्थानीय स्तर पर जांच हुई, जिसमें 25 लाभार्थियों के अपात्र पाए जाने की बात सामने आई।

मामले में अब बड़ा सवाल यह है कि अपात्र लाभार्थियों का चयन किस स्तर पर हुआ और योजना की धनराशि में हुई कथित अनियमितता के लिए जिम्मेदारी किसकी तय हुई?

पोखरी की जमीन को लेकर भी शिकायत

उपलब्ध दस्तावेजों में मई 2025 की एक अलग शिकायत में ग्राम पंचायत पुरैनिहा की सार्वजनिक पोखरी की भूमि को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री से कार्रवाई की मांग करते हुए पोखरी की भूमि से मिट्टी निकालने/बेचने और निजी हित में उपयोग किए जाने के आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध दस्तावेजों से नहीं होती है।

ग्राम विकास अधिकारी का पक्ष जानने का प्रयास, संपर्क नहीं हो सका

इस पूरे मामले में ग्राम विकास अधिकारी का पक्ष जानने के लिए फोन के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी खबर में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

अब सवाल यह है कि सरकारी रिकॉर्ड में अपात्र लाभार्थियों की पुष्टि और कार्रवाई का उल्लेख होने के बावजूद पूरे प्रकरण में जिम्मेदारी की अंतिम तस्वीर क्या है? क्या सरकारी धन की पूरी वसूली हुई और दोषी पाए गए लोगों पर आगे क्या कार्रवाई हुई—इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।

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