महिला अस्पताल को सीएचसी में स्थानांतरित करने के फैसले पर उठे सवाल, बोले—रात में गर्भवती महिलाओं के लिए बढ़ सकती है परेशानी, जरूरत पड़ी तो होगा आंदोलन
मनोज कुमार त्रिपाठी
नौतनवां, महराजगंज! नौतनवां कस्बे में स्थित महिला अस्पताल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) नौतनवां में स्थानांतरित किए जाने की चर्चा के बीच विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता जीतेंद्र जायसवाल ने 11 सितंबर को मुख्य चिकित्साधिकारी, महराजगंज को पत्र भेजकर महिला अस्पताल को किसी भी स्थिति में सीएचसी नौतनवां अथवा अन्य स्थान पर स्थानांतरित नहीं किए जाने की मांग की है।

जीतेंद्र जायसवाल ने पत्र में कहा है कि न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (न्यू पीएचसी) के जर्जर भवन को गिराए जाने के कारण कस्बे में संचालित महिला अस्पताल को सीएचसी में शिफ्ट किए जाने की चर्चा है। उन्होंने इसे महिला मरीजों और तीमारदारों की सुविधा की दृष्टि से उचित नहीं बताया।
उन्होंने कहा कि कस्बे से सीएचसी की दूरी करीब दो किलोमीटर है और अस्पताल तक पहुंचने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग पार करना पड़ता है। उनके अनुसार, इससे महिला मरीजों, गर्भवती महिलाओं और उनके तीमारदारों को विशेष रूप से परेशानी हो सकती है। उन्होंने बाईपास पर भारी वाहनों के जाम का भी हवाला देते हुए अस्पताल को कस्बे से दूर स्थानांतरित करने पर चिंता जताई।
भाजपा नेता ने विशेष रूप से रात के समय गर्भवती महिलाओं की आपात चिकित्सा सुविधा का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि रात में तत्काल उपचार की जरूरत पड़ने पर सीएचसी तक पहुंचना महिलाओं के लिए मुश्किल हो सकता है। जबकि कस्बे में स्थित महिला अस्पताल होने के कारण आसपास की महिलाएं जरूरत पड़ने पर अकेले भी पैदल अस्पताल पहुंच जाती हैं।

पत्र में उन्होंने सुझाव दिया कि जब तक नया भवन तैयार नहीं हो जाता, तब तक महिला अस्पताल में ही न्यू पीएचसी की ओपीडी के लिए कमरे या स्थान की व्यवस्था की जा सकती है। इससे महिला मरीजों की चिकित्सा सुविधा भी प्रभावित नहीं होगी और नए भवन के निर्माण तक वैकल्पिक व्यवस्था भी बनी रहेगी।
जीतेंद्र जायसवाल ने मुख्य चिकित्साधिकारी से पूरे मामले को महिला मरीजों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए संवेदनशीलता से देखने की मांग की है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि महिला अस्पताल को सीएचसी नौतनवां या किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया गया तो आमजन के विरोध और आंदोलन का सामना करना पड़ सकता है। इसकी जिम्मेदारी स्वास्थ्य प्रशासन और सीएमओ महराजगंज की होगी।
मामला अब महिला मरीजों की सुविधा, रात की आपात चिकित्सा और अस्पताल की पहुंच से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता नजर आ रहा है।



