कांग्रेस नेताओं के साथ दिखे पूर्व मंत्री, फरेंदा से चुनाव लड़ने का ऐलान; बेटे अमनमणि पहले ही थाम चुके हैं कांग्रेस का हाथ
उमेश चन्द्र त्रिपाठी
महराजगंज! उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की सियासी सरगर्मी अब जमीन पर दिखाई देने लगी है। राजनीतिक दल अपने-अपने समीकरण साधने में जुटे हैं और इसी बीच पूर्वांचल की राजनीति में पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी की सक्रियता ने नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अमर मणि त्रिपाठी अपनी पुरानी पार्टी कांग्रेस में वापसी की जमीन तैयार कर रहे हैं?

अमर मणि त्रिपाठी ने हाल ही में फरेंदा विधानसभा सीट से खुद चुनाव लड़ने और नौतनवां से अपने बेटे अमन मणि त्रिपाठी को मैदान में उतारने का ऐलान किया है। उन्होंने फरेंदा को अपने चाचा श्याम नारायण की राजनीतिक कर्मभूमि बताते हुए वहां से चुनाव लड़ने की बात कही है।
लेकिन उनके इस ऐलान के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि अमरमणि किस पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे?
कांग्रेस से शुरू हुआ था सियासी सफर
अमर मणि त्रिपाठी का राजनीतिक सफर कांग्रेस से शुरू हुआ था। उनके बेटे और नौतनवां के पूर्व विधायक अमनमणि त्रिपाठी मार्च 2024 में कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। उन्होंने कांग्रेस के तत्कालीन यूपी प्रभारी अविनाश पांडेय की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी।

अमन मणि 2017 में नौतनवां से बतौर निर्दलीय विधायक चुने गए थे। 2022 के विधानसभा चुनाव में वह बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े और तीसरे स्थान पर रहे। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया।
यानी त्रिपाठी परिवार का कांग्रेस से रिश्ता नया नहीं है। अब अमर मणि की हालिया राजनीतिक सक्रियता ने इस रिश्ते को लेकर चर्चाओं को फिर तेज कर दिया है।
कांग्रेस नेताओं से मुलाकात ने बढ़ाई हलचल
बीते 30 अगस्त को कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और उत्तर प्रदेश के सह-प्रभारी अभिषेक दत्त के पूर्वांचल दौरे के दौरान अमर मणि त्रिपाठी की मौजूदगी चर्चा में आई। रिपोर्टों के मुताबिक अमर मणि ने गोरखपुर एयरपोर्ट पर अभिषेक दत्त का स्वागत किया। कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत भी इस दौरे में मौजूद थीं। इसके बाद महराजगंज में कांग्रेस की संगठनात्मक गतिविधियों के दौरान अमरमणि की मौजूदगी ने उनकी कांग्रेस में संभावित वापसी की अटकलों को और हवा दी।


यही वजह है कि अब सियासी गलियारों में सवाल उठ रहा है—क्या ये महज राजनीतिक मुलाकात थी या 2027 से पहले किसी बड़े सियासी समीकरण की भूमिका तैयार हो रही है?
हालांकि अभी तक कांग्रेस ने अमर मणि त्रिपाठी को पार्टी में शामिल करने या उन्हें किसी सीट से टिकट देने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
फरेंदा में टिकट का सवाल भी आसान नहीं
अमरमणि के सामने सिर्फ पार्टी चुनने की चुनौती नहीं है, बल्कि टिकट का सवाल भी महत्वपूर्ण है।
फरेंदा विधानसभा सीट पर वर्तमान में कांग्रेस के वीरेंद्र चौधरी विधायक हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा की आधिकारिक वेबसाइट भी उन्हें फरेंदा से कांग्रेस विधायक के रूप में दर्ज करती है।

ऐसे में अगर कांग्रेस अपने मौजूदा विधायक को दोबारा मैदान में उतारती है, तो अमर मणि के लिए उसी सीट से टिकट हासिल करना पार्टी के भीतर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक सवाल होगा।
दूसरी तरफ अमर मणि ने खुद फरेंदा से चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। ऐसे में अगर कांग्रेस से उनकी बात आगे बढ़ती है, तो फरेंदा सीट पर टिकट को लेकर पार्टी के भीतर नए समीकरण बनना स्वाभाविक है।
नौतनवा में बेटे के लिए रास्ता?
दूसरा विकल्प नौतनवां विधानसभा सीट से जुड़ा है। अमरमणि ने घोषणा की है कि वह जिस सीट से खुद कई बार विधायक रह चुके हैं, उसे अपने बेटे अमनमणि के लिए छोड़ेंगे।

लेकिन यहां भी गठबंधन का गणित अहम होगा। अगर 2027 में सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन कायम रहता है, तो सीटों के बंटवारे में नौतनवां किस दल के हिस्से में जाती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
अमनमणि पहले से कांग्रेस में हैं, इसलिए नौतनवां को लेकर त्रिपाठी परिवार की नजरें कांग्रेस के संभावित चुनावी समीकरण पर भी हो सकती हैं। फिलहाल सीट बंटवारे को लेकर कोई अंतिम आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
सबसे बड़ा सवाल—क्या अमरमणि खुद चुनाव लड़ पाएंगे?
अमरमणि त्रिपाठी की राजनीतिक वापसी के सामने सबसे बड़ा सवाल कानूनी पात्रता का भी है?
मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में उन्हें उम्रकैद की सजा हुई थी और 25 अगस्त 2023 में उनकी समयपूर्व रिहाई हुई। सितंबर 2026 की एक रिपोर्ट में कानूनविद के हवाले से लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8(3) के तहत उनकी चुनावी पात्रता पर सवाल उठाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, दो वर्ष या उससे अधिक की सजा पाने वाले व्यक्ति के लिए रिहाई के बाद छह वर्ष तक चुनाव लड़ने की अयोग्यता का प्रावधान लागू हो सकता है।

इसलिए अमरमणि के सामने सिर्फ कांग्रेस का टिकट हासिल करने का सवाल नहीं है, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि 2027 में वह कानूनी रूप से चुनाव लड़ने के योग्य होंगे या नहीं?
यानी फिलहाल उनकी चुनावी घोषणा और वास्तविक चुनावी पात्रता—दो अलग-अलग सवाल हैं?
पूर्वांचल में पुराने सियासी समीकरणों की चर्चा
अमर मणि त्रिपाठी का नाम पूर्वांचल की राजनीति में लंबे समय से प्रभावशाली राजनीतिक दौर से जुड़ा रहा है। उनकी सक्रियता के बाद महराजगंज और आसपास के क्षेत्रों में पुराने राजनीतिक समीकरणों की चर्चा फिर शुरू हो गई है।
हालांकि किसी विशेष जातीय समूह के मतदाताओं पर किसी नेता के प्रभाव को निश्चित रूप से बताने के लिए वर्तमान चुनावी आंकड़े या विश्वसनीय सर्वेक्षण जरूरी होंगे। इसलिए फिलहाल इतना कहना ही उचित है कि अमर मणि त्रिपाठी की सक्रियता ने पूर्वांचल की जातीय और राजनीतिक गोलबंदी को लेकर चर्चाओं को जरूर तेज कर दिया है।

2027 से पहले तीन बड़े सवाल
अमर मणि त्रिपाठी की सक्रियता ने 2027 के चुनाव से पहले महराजगंज की राजनीति में तीन बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं—
पहला: क्या अमरमणि त्रिपाठी कांग्रेस में औपचारिक वापसी करेंगे?
दूसरा: अगर कांग्रेस में वापसी होती है तो फरेंदा से मौजूदा विधायक वीरेंद्र चौधरी और अमरमणि के बीच टिकट का समीकरण कैसे बनेगा?

तीसरा: क्या कानूनी स्थिति अमरमणि को खुद चुनाव लड़ने की अनुमति देगी?
फिलहाल तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। अमरमणि चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके हैं, उनके बेटे अमनमणि कांग्रेस में हैं और कांग्रेस नेताओं के साथ उनकी हालिया मौजूदगी ने राजनीतिक अटकलों को तेज कर दिया है। लेकिन कांग्रेस में अमरमणि की वापसी और उनके टिकट को लेकर अंतिम फैसला अभी सामने नहीं आया है।
अब नजर इस बात पर है कि 2027 के चुनाव से पहले अमरमणि त्रिपाठी का अगला सियासी कदम क्या होता है—पुरानी पार्टी में घर वापसी या किसी दूसरे राजनीतिक रास्ते की तलाश?



