बोले- 20-30 साल से पार्टी के लिए काम करने वाले समीर त्रिपाठी को आखिर कब मिलेगा मौका? फरेंदा और कैंपियरगंज में भी पुराने नेताओं की दावेदारी पर उठाए सवाल
मनोज कुमार त्रिपाठी
नौतनवा विधानसभा क्षेत्र में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा की संभावित टिकट दावेदारी के बीच सियासी हलचल तेज हो गई है। इसी बीच दिल्ली विश्वविद्यालय से पीएचडी कर चुके और पांच वर्ष तक विश्वविद्यालय में सहायक आचार्य रहे डॉ. संपूर्णानंद मल ने भाजपा के पुराने नेता समीर त्रिपाठी की दावेदारी को लेकर पार्टी नेतृत्व से सीधे सवाल किए हैं।
डॉ. संपूर्णानंद मल ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि वह दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर नहीं रहे, बल्कि उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पीएचडी की है और इस विश्वविद्यालय में पांच वर्ष तक सहायक आचार्य के पद पर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह करीब 40 वर्षों से इस क्षेत्र में रह रहे हैं और लंबे समय से पूर्वांचल की राजनीति तथा भाजपा संगठन से जुड़े नेताओं को करीब से देखते रहे हैं।

समीर त्रिपाठी से पुराने संबंध का किया जिक्र
डॉ. मल ने समीर त्रिपाठी के साथ अपने पुराने संबंधों का जिक्र करते हुए करीब 15-20 वर्ष पहले हुई एक दुर्घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि हादसे के बाद समीर त्रिपाठी को तत्काल रक्त की जरूरत पड़ी थी और उस समय उन्होंने रक्तदान किया था। डॉ. मल ने कहा कि उस दौरान बजरंग बहादुर सिंह और पंकज चौधरी समेत कई लोग वहां मौजूद थे।
उन्होंने कहा कि समीर त्रिपाठी से उनके लंबे समय से संबंध रहे हैं और उन्होंने उन्हें छात्र राजनीति से लेकर संगठनात्मक गतिविधियों तक सक्रिय रूप से काम करते देखा है।
‘समीर त्रिपाठी का टिकट क्यों काटा जाता है?’
डॉ. संपूर्णानंद मल ने भाजपा नेतृत्व से सवाल किया कि पिछले कई वर्षों से पार्टी के लिए काम करने वाले समीर त्रिपाठी को विधानसभा चुनाव में मौका क्यों नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा कि समीर त्रिपाठी लंबे समय तक भाजपा संगठन से जुड़े रहे हैं और महाराजगंज जिले के भाजपा अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। डॉ. मल के मुताबिक, पार्टी के ऐसे नेताओं की दावेदारी पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए, जिन्होंने लंबे समय तक संगठन के लिए काम किया है।
उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का जिक्र करते हुए कहा कि समीर त्रिपाठी ने राजनाथ सिंह, डॉ. रमापति राम त्रिपाठी, पंकज चौधरी और बजरंग बहादुर सिंह समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के साथ संगठन में काम किया है।

अमर मणि और टिकट को लेकर भी उठाए सवाल
डॉ. मल ने अपने बयान में अमर मणि का भी जिक्र किया और भाजपा की टिकट प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब पार्टी पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं की दावेदारी पर विचार करती है तो अन्य चेहरों को चुनावी मैदान में उतारने का आधार क्या होता है।
उन्होंने कहा कि पार्टी को अपने पुराने कार्यकर्ताओं और जमीनी नेताओं के योगदान को ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को लेकर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से जवाब मांगने की बात कही।

फरेंदा में बजरंग बहादुर सिंह का भी लिया नाम
डॉ. संपूर्णानंद मल ने फरेंदा विधानसभा क्षेत्र का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बजरंग बहादुर सिंह जैसे पुराने और क्षेत्र में सक्रिय नेताओं की दावेदारी को भी पार्टी को गंभीरता से देखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि फरेंदा में कौन चुनाव लड़ेगा, यह पार्टी का निर्णय है, लेकिन स्थानीय और लंबे समय से संगठन के साथ जुड़े नेताओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

कैंपियरगंज में समीर सिंह का जिक्र
डॉ. मल ने कैंपियरगंज विधानसभा क्षेत्र में समीर सिंह का भी नाम लिया। उन्होंने कहा कि समीर सिंह लंबे समय से भाजपा और संगठन की राजनीति से जुड़े रहे हैं और उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन का बड़ा हिस्सा पार्टी के लिए काम करते हुए बिताया है।
उन्होंने सवाल किया कि जो नेता वर्षों से संगठन के साथ खड़े रहे, उन्हें चुनावी अवसर कब मिलेगा?
‘जाति और धर्म से ऊपर उठकर फैसला हो’
डॉ. संपूर्णानंद मल ने कहा कि विधानसभा टिकट का फैसला जाति और धर्म से ऊपर उठकर किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, उम्मीदवार के संगठनात्मक योगदान, जमीनी पकड़ और लंबे राजनीतिक जुड़ाव को भी महत्व दिया जाना चाहिए।
उन्होंने भाजपा के प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व से अपील करते हुए कहा कि नौतनवा से समीर त्रिपाठी के नाम पर गंभीरता से विचार किया जाए। साथ ही फरेंदा में बजरंग बहादुर सिंह और कैंपियरगंज में समीर सिंह जैसे नेताओं की दावेदारी को भी पार्टी नेतृत्व देखे।
भाजपा नेतृत्व से सीधी अपील
डॉ. संपूर्णानंद मल ने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं, प्रदेश अध्यक्ष और संगठन के शीर्ष पदाधिकारियों से अपील की कि टिकट वितरण में पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं के योगदान को ध्यान में रखा जाए।
उन्होंने कहा कि उन्होंने समीर त्रिपाठी को लंबे समय से भाजपा के लिए काम करते हुए देखा है और ऐसे नेताओं को चुनावी मैदान में उतरने का अवसर मिलना चाहिए।
डॉ. मल के बयान में भाजपा की टिकट नीति और कुछ नेताओं को लेकर कई तीखी टिप्पणियां और आरोप भी सामने आए हैं। ये टिप्पणियां डॉ. संपूर्णानंद मल के बयान पर आधारित हैं। संबंधित नेताओं और भाजपा संगठन का पक्ष इस खबर में शामिल नहीं है। उनका पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले नौतनवा, फरेंदा और कैंपियरगंज में संभावित उम्मीदवारों को लेकर भाजपा के भीतर और बाहर चर्चा तेज है। ऐसे में डॉ. संपूर्णानंद मल का यह बयान पुराने नेताओं की दावेदारी और पार्टी की टिकट नीति को लेकर चल रही बहस को और हवा दे सकता है।
