भगवान बुद्ध के ननिहाल बनर्सिहा कला उर्फ देवदह में तीन दिवसीय महोत्सव का आगाज, पुरातत्त्व विभाग पर लापरवाही का आरोप
महराजगंज के बनर्सिहा कला उर्फ देवदह में 3 करोड़ के विपश्यना हॉल पर विवाद, समिति ने प्रशासन से की खोलने की मांग
उमेश चन्द्र त्रिपाठी
महराजगंज! भगवान बुद्ध के ननिहाल के रूप में विख्यात बनर्सिहा कला उर्फ देवदह में 14से16 अक्टूबर तक तीन दिवसीय प्रशिक्षण, विपश्यना एवं देवदह महोत्सव का शुभारंभ हुआ।
नौतनवां तहसील क्षेत्र के बनर्सिहा कला उर्फ देवदह में विभिन्न प्रदेशों से पहुंचे बौद्ध भिक्षुओं ने पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम की शुरुआत की। हालांकि, करीब तीन करोड़ रुपये की लागत से बने विपश्यना हॉल का ताला नहीं खुलने से विवाद खड़ा हो गया। इसको लेकर बौद्ध भिक्षुओं और देवदह विकास समिति के पदाधिकारियों ने नाराजगी जताई और हॉल खुलवाने की मांग की।
देवदह रामग्राम बौद्ध विकास समिति के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि महोत्सव की पूर्व सूचना संबंधित अधिकारियों को देने और जिलाधिकारी से आश्वासन मिलने के बावजूद कार्यक्रम के दौरान हॉल नहीं खोला गया। समिति ने इसके लिए पुरातत्त्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
समिति के अध्यक्ष जितेंद्र राव के मुताबिक, समिति पिछले करीब 20 वर्षों से देवदह में बौद्ध परंपराओं, धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करती आ रही है। उनके अनुसार, इस बार हॉल के उपयोग की अनुमति नहीं मिलने से बाहर से आए बौद्ध भिक्षुओं और आयोजकों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
जितेंद्र राव ने बताया कि हॉल को पहले ठेकेदार को दिए जाने के मामले को लेकर समिति ने जिलाधिकारी से शिकायत की थी। उनके मुताबिक, जिलाधिकारी के प्रयास से हॉल खाली कराया गया, लेकिन इसके बाद भी महोत्सव के लिए हॉल उपलब्ध नहीं कराया गया। उन्होंने दावा किया कि जिलाधिकारी से मुलाकात के दौरान हॉल खुलवाने का आश्वासन मिला था, लेकिन कार्यक्रम के समय समस्या बनी रही।
समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि देवदह का ऐतिहासिक और बौद्ध धार्मिक महत्व है। उनके अनुसार, वर्ष 1999 में केंद्रीय पुरातत्त्व विभाग की ओर से यहां उत्खनन कराया गया था। समिति लंबे समय से इस स्थल के विकास और पहचान को व्यापक स्तर पर स्थापित करने की मांग करती रही है।
महोत्सव का आयोजन सम्राट अशोक और डॉ. भीमराव आंबेडकर के बौद्ध धम्म दीक्षा दिवस के अवसर से जोड़कर किया जाता है। समिति का कहना है कि ऐसे आयोजन बौद्ध संस्कृति और परंपराओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
समिति ने जिला प्रशासन और पुरातत्त्व विभाग से विपश्यना हॉल को जल्द खुलवाने तथा भविष्य में इस तरह की परेशानी से बचने के लिए आवश्यक व्यवस्था करने की मांग की है। हालांकि, इस मामले में पुरातत्त्व विभाग का पक्ष सामने आना बाकी है।

