लखनऊ: जाली नोटों के नेपाली सप्लायर को 9 साल 7 माह की सजा, 30 हजार रुपये का जुर्माना

26.03 लाख रुपये की हाई-क्वालिटी जाली भारतीय करेंसी बरामदगी मामले में ATS कोर्ट का बड़ा फैसला, 2015 में सोनौली बॉर्डर से हुई थी गिरफ्तारी

मनोज कुमार त्रिपाठी

लखनऊ। भारतीय जाली मुद्रा की तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई में विशेष न्यायाधीश ATS कोर्ट ने नेपाली नागरिक शेख जावेद इकबाल उर्फ अशफाक अंसारी को 9 साल 7 माह के कारावास और 30 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने यह फैसला 22 अक्टूबर 2026 को सुनाया। ATS की प्रभावी पैरवी को इस मामले में अहम माना जा रहा है।

26 लाख से अधिक की जाली करेंसी के साथ हुई थी गिरफ्तारी

ATS के मुताबिक, 23 फरवरी 2015 को भारत-नेपाल सीमा के सोनौली क्षेत्र, जनपद महाराजगंज से आरोपी शेख जावेद इकबाल उर्फ अशफाक अंसारी को गिरफ्तार किया गया था। उसके कब्जे से 26 लाख 3 हजार 500 रुपये मूल्य के जाली भारतीय नोट बरामद किए गए थे।

इस मामले में लखनऊ स्थित ATS थाने में मुकदमा संख्या 01/2015 दर्ज किया गया था। आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 489B और 489C के तहत मुकदमा चलाया गया।

हाई-क्वालिटी जाली नोटों के विदेशी कनेक्शन की जांच

जांच के दौरान बरामद जाली नोट उच्च गुणवत्ता के पाए गए और उनके विदेशी आयातित होने की बात सामने आई। इसके बाद मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की धारा 16 भी जोड़ी गई।

दोषी शेख जावेद मूल रूप से नेपाल के नारायणी, परसा, बेलवा का निवासी बताया गया है। उसका लखनऊ में मेहताबबाग, हुसैनाबाद का पता भी दर्ज है।

ATS की पैरवी के बाद आया फैसला

करीब 11 साल पुराने इस मामले में अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। जाली भारतीय मुद्रा की इतनी बड़ी बरामदगी और मामले में UAPA की धारा जुड़ने के चलते यह फैसला अहम माना जा रहा है।

संदेश साफ है: जाली भारतीय मुद्रा के कारोबार के खिलाफ जांच एजेंसियों की कार्रवाई और अदालत की सख्ती ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण है।

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