इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम निर्णय, हत्या के मामले में सजा में बड़ी राहत; अब गैर इरादतन हत्या के दोष में काटनी होगी 10 साल की कठोर कैद
मनोज कुमार त्रिपाठी
बस्ती। उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के बहुचर्चित शंभूशरण पाल हत्याकांड में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने करीब 31 साल पुराने इस मामले में अभियुक्त पूर्व विधायक राम करन आर्य की आजीवन कारावास की सजा को संशोधित करते हुए गैर इरादतन हत्या के अपराध में 10 साल के कठोर कारावास में तब्दील कर दिया है।
हाईकोर्ट के इस फैसले से लंबे समय से सुर्खियों में रहे इस चर्चित हत्याकांड में एक अहम कानूनी मोड़ आया है। उम्रकैद की सजा को घटाकर 10 साल की कठोर कैद किए जाने से पूर्व विधायक को सजा के मामले में बड़ी राहत मिली है।
करीब तीन दशक पुराने इस मामले में अदालत के फैसले ने एक बार फिर शंभूशरण पाल हत्याकांड को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। हालांकि, सजा में संशोधन का अर्थ दोषमुक्ति नहीं है, बल्कि अदालत द्वारा अपराध की श्रेणी और उसके अनुरूप दंड में बदलाव किया जाना है।
31 साल बाद भी चर्चा में हत्याकांड
बस्ती का यह मामला लंबे समय से कानूनी और राजनीतिक हलकों में चर्चित रहा है। अब इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद इस मामले में सजा की प्रकृति बदल गई है। पूर्व विधायक राम करन आर्य को आजीवन कारावास के स्थान पर अब गैर इरादतन हत्या के अपराध में 10 साल का कठोर कारावास भुगतना होगा।
हाईकोर्ट के फैसले ने बदली सजा की तस्वीर
इस फैसले का सबसे अहम पहलू यह है कि अदालत ने आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखने के बजाय उसे 10 साल के कठोर कारावास में बदल दिया। हालांकि, फैसले के विस्तृत कानूनी आधार, सजा में बदलाव के कारणों और अन्य शर्तों की पुष्टि अदालत के आदेश की प्रति से की जानी चाहिए।





