भगवानपुर में समन्वय बैठक के बाद संयुक्त गश्त, दुकानदारों और स्थानीय लोगों को किया जागरूक
मनोज कुमार त्रिपाठी
महाराजगंज (उत्तर प्रदेश), 24 अक्टूबर 2026। बालश्रम एवं मानव तस्करी जैसी गंभीर सामाजिक बुराइयों पर अंकुश लगाने और आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से सशस्त्र सीमा बल (SSB) की 22वीं वाहिनी के सी समवाय भगवानपुर द्वारा स्थानीय पुलिस एवं NGO (PGSS) के साथ समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक के उपरांत संयुक्त गश्त कर लोगों को बालश्रम रोकने और मानव तस्करी के विरुद्ध सतर्क रहने का संदेश दिया गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 24 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2:30 बजे से शाम 4:15 बजे तक सी समवाय भगवानपुर में आयोजित बैठक के दौरान बालश्रम एवं मानव तस्करी की रोकथाम से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में आपसी समन्वय मजबूत करने, संदिग्ध गतिविधियों के प्रति सतर्कता बरतने तथा ऐसी गतिविधियों की जानकारी तत्काल संबंधित अधिकारियों को देने पर जोर दिया गया।
बैठक के बाद SSB, स्थानीय पुलिस एवं NGO (PGSS) की संयुक्त टीम ने सी समवाय भगवानपुर से चेक प्वाइंट भगवानपुर होते हुए भगवानपुर बाजार तक गश्त की। इस दौरान स्थानीय नागरिकों एवं दुकानदारों को बालश्रम न कराने, बच्चों के शोषण को रोकने तथा मानव तस्करी जैसी गैरकानूनी गतिविधियों के प्रति जागरूक किया गया। साथ ही, किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस एवं संबंधित अधिकारियों को देने की अपील की गई।

संयुक्त अभियान में इन कार्मिकों ने लिया भाग
इस समन्वय बैठक एवं संयुक्त गश्त में सशस्त्र सीमा बल की ओर से निरीक्षक अरुण कुमार पाण्डेय, उप निरीक्षक अमित कुमार एवं पांच अन्य बलकार्मिक शामिल रहे। स्थानीय पुलिस, भगवानपुर की ओर से आरक्षी पंकज सरोज ने सहभागिता की। वहीं, NGO (PGSS) की ओर से श्री श्रवण कुमार, पुष्पा चौधरी एवं तीन अन्य कार्मिकों ने भाग लिया।
सामाजिक सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयास पर जोर
इस संयुक्त पहल का मुख्य उद्देश्य बालश्रम एवं मानव तस्करी की रोकथाम के लिए सुरक्षा एजेंसियों, सामाजिक संगठनों और आमजन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा समाज में जागरूकता बढ़ाना रहा। अभियान के माध्यम से लोगों को संदेश दिया गया कि बच्चों का शोषण रोकना और मानव तस्करी के विरुद्ध आवाज उठाना सामूहिक जिम्मेदारी है।

सशस्त्र सीमा बल की इस पहल से बाल संरक्षण एवं मानव तस्करी की रोकथाम के प्रति जागरूकता बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर जनसहभागिता को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किया गया।





