पीड़ित का आरोप—अदालती आदेश के बावजूद नहीं हटा अवैध निर्माण, अब जवाबदेही तय करने की मांग तेज।
मनोज कुमार त्रिपाठी
महराजगंज/नौतनवा। न्यायालय के स्पष्ट आदेश, पुलिस की रिपोर्ट और राजस्व विभाग की संस्तुति के बावजूद करीब दो महीने बीत जाने पर भी कार्रवाई न होने का मामला सामने आया है। 18 वर्षों तक चले भूमि विवाद में न्यायालय द्वारा वादी के पक्ष में फैसला सुनाए जाने के बाद अब पुलिस और प्रशासन की कार्यशैली सवालों के घेरे में है।
मामला मौजा जुगौली, तहसील नौतनवा स्थित भूमि विवाद से जुड़ा है। उपलब्ध न्यायालयी दस्तावेजों के अनुसार वर्ष 2008 से लंबित इस वाद में 25 मई 2026 को सिविल जज (प्रवर खंड), महराजगंज ने वादी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए विवादित भूमि पर किए गए अवैध निर्माण को हटाने का आदेश पारित किया। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यदि प्रतिवादी निर्धारित समय के भीतर स्वयं निर्माण नहीं हटाते हैं, तो वादी न्यायालय की प्रक्रिया के माध्यम से निर्माण हटवाने का अधिकारी होगा तथा उसका खर्च भी प्रतिवादी से वसूला जा सकेगा।

दस्तावेजों के अनुसार, न्यायालय के आदेश के अनुपालन के संबंध में थाना सोनौली की ओर से भी उपजिलाधिकारी नौतनवा को पत्र भेजकर राजस्व विभाग एवं सक्षम मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में आवश्यक कार्रवाई कराए जाने का अनुरोध किया गया। इसके बावजूद, पीड़ित पक्ष का आरोप है कि आदेश के लगभग दो महीने बाद भी न तो अवैध निर्माण हटाया गया और न ही प्रभावी कार्रवाई हुई।
वादी पक्ष के प्रतिनिधि प्रवीण सिन्हा का कहना है कि न्यायालय का फैसला आने के बाद से वह लगातार थाना और प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। उनका आरोप है कि हर बार उन्हें अलग-अलग कारण बताकर टाल दिया जाता है। कभी प्रार्थना पत्र देने की बात कही जाती है तो कभी अगले दिन आने के लिए कहा जाता है, लेकिन आदेश का पालन अब तक नहीं हुआ।

प्रवीण सिन्हा ने कहा कि उनका मामला 18 वर्षों तक न्यायालय में चला, जिसके बाद उन्हें न्याय मिला। लेकिन यदि न्यायालय के आदेश का समय पर पालन ही नहीं होगा, तो आम नागरिक का न्याय व्यवस्था पर विश्वास प्रभावित होगा। उन्होंने कहा कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे जिलाधिकारी तथा पुनः न्यायालय की शरण लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई करेंगे।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब न्यायालय का स्पष्ट आदेश मौजूद है, पुलिस द्वारा भी आवश्यक पत्राचार किया जा चुका है, तब आखिर कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है? इस पूरे मामले ने पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित विभाग न्यायालय के आदेश का पालन कब सुनिश्चित करता है।
वहीं, इस संबंध में जब पुलिस से बात की गई तो पुलिस का कहना था कि मामले की जानकारी प्राप्त हो चुकी है और आवश्यक पत्राचार के माध्यम से प्रकरण राजस्व विभाग को भेज दिया गया है। पुलिस के अनुसार, राजस्व विभाग से आवश्यक पुष्टि (कन्फर्मेशन) प्राप्त होते ही नियमानुसार आगे की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।

