म्यूल खातों से ठगी, फिर USDT में बदलते थे रकम! कैश काउंटिंग मशीन, 13.76 लाख नकद और 22 ATM कार्ड बरामद, पांच आरोपी अब भी फरार
गोरखपुर में साइबर ठगों के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश, 4 करोड़ से अधिक की ठगी का मामला आया सामने
मनोज कुमार त्रिपाठी
गोरखपुर। साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए गोरखपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने गिरोह के सरगना नवनीत पाण्डेय समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि गिरोह के पांच अन्य सदस्य अभी फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस के मुताबिक, इस नेटवर्क से करीब 4 करोड़ 9 लाख 11 हजार 738 रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और साइबर ठगी का मामला सामने आया है।

पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज विवरण के अनुसार, गिरफ्तार अभियुक्तों में नवनीत पाण्डेय उर्फ आदेश पाण्डेय, पुत्र नरसिंह पाण्डेय, निवासी वार्ड नंबर 14, गौतम बुद्ध नगर, थाना नौतनवां, जनपद महराजगंज, उम्र करीब 22 वर्ष शामिल है। पुलिस रिकॉर्ड में उसे स्थानीय ग्रुप लीडर बताया गया है। आरोप है कि वह सोशल मीडिया ग्रुप से जुड़े खातों की डिटेल अन्य सदस्यों से प्राप्त कर साइबर ठगी की रकम मंगवाने, नकदी निकलवाने और रकम को यूएसडीटी में परिवर्तित कराने के लिए आगे भेजने का काम करता था। उसके कब्जे से दो मोबाइल फोन, दो सिमकार्ड, एक चेकबुक, दो पासबुक और 54,000 रुपये नकद बरामद किए जाने का उल्लेख है। दूसरे अभियुक्त रवि वर्मा, पुत्र विजय प्रकाश वर्मा, निवासी बसंतपुर, थाना राजघाट, जनपद गोरखपुर, उम्र 28 वर्ष को पुलिस रिकॉर्ड में म्यूल खाता उपलब्ध कराने और कमीशन पर काम करने वाला बताया गया है। आरोप है कि वह लोगों को लालच देकर उनके एटीएम कार्ड और चेकबुक लेता था तथा खातों से निकाली गई रकम में से अपना कमीशन काटकर बाकी रकम अन्य साथियों को देता था। उसके पास से एक मोबाइल फोन और 300 रुपये नकद बरामद हुए। तीसरे अभियुक्त आदर्श सिंह उर्फ थायनोस, पुत्र स्वर्गीय आनंद स्वरूप सिंह, निवासी चंदौली, जनपद चंदौली, उम्र करीब 22 वर्ष पर नकदी को यूएसडीटी में परिवर्तित कराने में सहयोग करने का आरोप है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उसके पास से एक मोबाइल फोन, 45,000 रुपये नकद और एक चेकबुक बरामद हुई। चौथी अभियुक्त प्रज्ञा रतन, पुत्र बाबूलाल, निवासी आवास विकास कॉलोनी, कूड़ाघाट, थाना एम्स, जनपद गोरखपुर, उम्र करीब 23 वर्ष को भी नकदी को यूएसडीटी में परिवर्तित कराने के काम से जुड़ा बताया गया है। उसके पास से एक मोबाइल फोन, 700 रुपये नकद, एक नेपाली सिम और एक एटीएम कार्ड बरामद होने का उल्लेख है। पांचवें अभियुक्त मकसूद आलम खान, पुत्र रुस्तम अली खान, निवासी करीमनगर, थाना चिलुआताल, जनपद गोरखपुर, उम्र करीब 42 वर्ष पर विदेशी एजेंटों के माध्यम से रकम को यूएसडीटी में परिवर्तित कर आगे भेजने का आरोप है। पुलिस रिकॉर्ड में उसके पास से 19 एटीएम कार्ड, एक मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, दो चेकबुक, दो खाली मुहरें, 12,76,700 रुपये नकद तथा 4,394 यूएसडीटी बरामद होने का उल्लेख है। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह कथित तौर पर विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से साइबर ठगी की रकम प्राप्त कर उसे नकदी और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए आगे हस्तांतरित करता था।

पुलिस की इस कार्रवाई से साइबर अपराधियों के उस नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जो कथित तौर पर बैंक खातों के माध्यम से ठगी की रकम का लेन-देन करता था और बाद में उसे क्रिप्टोकरेंसी USDT में बदल देता था। मामले का खुलासा एसपी क्राइम ने प्रेसवार्ता के दौरान किया।
### म्यूल खातों के जरिए रकम का खेल
पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य साइबर अपराध से प्राप्त रकम को म्यूल बैंक खातों में मंगवाते थे। इसके बाद इन खातों से नकदी निकालकर उसे USDT यानी अमेरिकी डॉलर से जुड़ी क्रिप्टोकरेंसी में परिवर्तित किया जाता था। इस प्रक्रिया के जरिए रकम को अलग-अलग माध्यमों से स्थानांतरित किया जाता था, जिससे उसके वास्तविक स्रोत का पता लगाने में चुनौती पैदा होती थी।
म्यूल खाते ऐसे बैंक खाते होते हैं, जिनका इस्तेमाल दूसरों की रकम को स्थानांतरित करने के लिए किया जाता है। साइबर अपराध के मामलों में इन खातों का दुरुपयोग ठगी से प्राप्त धन को इधर-उधर करने के लिए किया जाता है।
### नकदी से लेकर डिजिटल उपकरणों तक बरामदगी
पुलिस की कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से 13.76 लाख रुपये नकद, 22 एटीएम कार्ड, नेपाली मुद्रा और कैश काउंटिंग मशीन बरामद की गई है। इसके अलावा मोबाइल फोन, लैपटॉप समेत अन्य सामान भी बरामद किए गए हैं। पुलिस ने एक कार और एक बाइक भी जब्त की है।
बरामद सामान और बैंक खातों से जुड़े लेन-देन की जांच के जरिए पुलिस गिरोह की गतिविधियों और उसके वित्तीय नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
### पांच आरोपी फरार, नेटवर्क की जांच जारी
गिरोह के पांच सदस्यों की गिरफ्तारी के बावजूद पांच अन्य आरोपियों के फरार होने से मामले की जांच अभी जारी है। पुलिस का प्रयास है कि गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए और ठगी की रकम के लेन-देन से संबंधित पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
गोरखपुर पुलिस की इस कार्रवाई ने एक बार फिर साइबर अपराध में बैंक खातों और डिजिटल माध्यमों के दुरुपयोग को उजागर किया है। अब जांच का केंद्र गिरोह के अन्य सदस्यों, म्यूल खातों के संचालकों और कथित तौर पर USDT में बदली गई रक
म के वित्तीय लेन-देन पर रहेगा।
