उमेश चन्द्र त्रिपाठी
महराजगंज! नेपाल में बंद पड़ी फैक्ट्रियों के स्क्रैप को छोटे टुकड़ों में काटकर भारतीय इलाकों में लाया जा रहा है। इसके अलावा नेपाल के मेडिकल कॉलेजों से निकलने वाला कचरा भी अवैध रूप से भारत में खपाया जा रहा है। यह तस्करी मुख्य रास्तों की बजाय पगडंडियों और चोर रास्तों से ठेलों के जरिए की जा रही है।

इस अवैध तस्करी में लिप्त तस्कर उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के सीमावर्ती इलाकों में सबसे ज्यादा सक्रिय हैं।
तस्करी का उपयोग जिन रास्तों से किया जा रहा है उसमें नौतनवां, निचलौल, ठूठीबारी,राजाबारी,झिंगटी,भगवानपुर, श्यामकाट, सोनौली,प्रेम नगर कॉलोनी, रजिया घाट, सुंडी, डंडाहेड, खनुआ हरदी डाली, मुर्दहिया घाट,चंडीथान, बैरिया घाट,संपतिहा, जोगियाबारी और खैराघाट प्रमुख हैं।
इस पूरे नेटवर्क के पीछे ठूठीबारी क्षेत्र से जुड़े लोगों का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है। कहने को तो एसएसबी से लेकर तमाम सुरक्षा एजेंसियां, पुलिस और प्रशासन चौकसी की दावा तो करती है पर जमीन पर उनका दावा पूरी तरह खोखला साबित हो रहा है।
हालांकि उच्चाधिकारियों द्वारा समय-समय पर सीमावर्ती थानों की पुलिस और एसएसबी के जवानों को तस्करी रोकने के लिए सख्त कार्रवाई और गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए जाते हैं। बावजूद इसके तस्करों के हौसले बुलंद हैं और तस्करी रुकने का नाम नहीं ले रहा है।

