फरेंदा की संभावित चुनावी चर्चा से लेकर यूपी की राजनीति तक, प्रशासनिक अनुभव वाले दो चेहरों ने चुना जनसेवा का रास्ता
मनोज कुमार त्रिपाठी
महराजगंज/लखनऊ। सरकारी सेवा में ऊंचे पदों पर जिम्मेदारी निभाने के बाद जनता के बीच आकर काम करने का संकल्प—उत्तर प्रदेश की राजनीति में डॉ. निशांत मणि त्रिपाठी और पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल के फैसले इन दिनों चर्चा का विषय हैं। दोनों ने अपनी-अपनी सरकारी सेवा से अलग होकर सार्वजनिक जीवन और राजनीति में नई भूमिका की दिशा चुनी है। उनके इस कदम को जनसेवा के नजरिये से देखा जा रहा है, हालांकि जनता के बीच उनकी भावी भूमिका और प्राथमिकताएं उनके आगामी कार्यों से स्पष्ट होंगी।
डॉ. निशांत मणि त्रिपाठी: वैज्ञानिक से संयुक्त निदेशक तक का सफर
परिवार से प्राप्त जानकारी के अनुसार, डॉ. निशांत मणि त्रिपाठी ने 27 नवंबर 2007 को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत NIELIT में वैज्ञानिक-बी के पद पर अपनी सेवा शुरू की थी। लगभग 19 वर्षों के सेवाकाल में उन्होंने गोरखपुर, लखनऊ, दिल्ली, पाली (राजस्थान) और ईटानगर (अरुणाचल प्रदेश) में कार्य किया। परिवार के मुताबिक, उन्होंने 5 जून 2026 को संयुक्त निदेशक के पद से इस्तीफा दे दिया।

तकनीकी शिक्षा, शोध और संस्थागत कार्यों का अनुभव रखने वाले डॉ. निशांत मणि त्रिपाठी अब सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में अपनी भूमिका को लेकर चर्चा में हैं। फरेंदा विधानसभा क्षेत्र से 2027 के चुनाव में उनकी संभावित दावेदारी की भी चर्चा है। यदि वह चुनावी मैदान में उतरते हैं, तो क्षेत्र की शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, किसानों की समस्याओं और बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दों पर उनकी सोच और कार्ययोजना महत्वपूर्ण होगी।

दिव्या मित्तल: IAS की जिम्मेदारियों के बाद राजनीति में नई पारी
पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने भी प्रशासनिक सेवा से अलग होकर राजनीति में कदम रखा है। अपने प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में जिम्मेदारियां निभाईं। मिर्जापुर की जिलाधिकारी के रूप में उनके कार्यकाल में पेयजल जैसी बुनियादी समस्या के समाधान के प्रयासों की चर्चा रही। इसके अलावा उन्होंने शासन और प्रशासन से जुड़ी अन्य जिम्मेदारियां भी संभालीं।

प्रशासनिक सेवा छोड़ने के बाद दिव्या मित्तल ने जन नीति भारत नाम से राजनीतिक पार्टी की घोषणा की और 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी के उतरने की बात कही। उनका यह कदम प्रशासनिक अनुभव को राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन में इस्तेमाल करने की दिशा में नई शुरुआत है। हालांकि, फरेंदा से चुनाव लड़ने को लेकर उनकी ओर से किसी आधिकारिक घोषणा की पुष्टि नहीं हुई है।

नौकरी से जनसेवा तक: अब जनता की उम्मीदों पर नजर
सरकारी सेवा में रहते हुए अधिकारी नीतियों और प्रशासनिक व्यवस्था के तहत काम करते हैं, जबकि राजनीति में जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं को उठाने और समाधान के लिए जवाबदेही निभाने की अपेक्षा होती है। डॉ. निशांत मणि त्रिपाठी और दिव्या मित्तल के लिए भी अब यही सबसे अहम कसौटी होगी कि वे अपने अनुभव को आम लोगों की जरूरतों से किस तरह जोड़ते हैं।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों अपने-अपने राजनीतिक सफर में जनहित, पारदर्शिता, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास को लेकर क्या ठोस प्राथमिकताएं सामने रखते हैं। सरकारी पद छोड़ना उनके जीवन का एक बड़ा बदलाव जरूर है, लेकिन जनता की सेवा के संकल्प की वास्तविक तस्वीर उनके काम, योजनाओं और जनता के प्रति जवाबदेही से सामने आएगी।







