थम गई थानेदार सूर्य प्रकाश सिंह की जिंदगी,जांच में जुटी पुलिस

उमेश चन्द्र त्रिपाठी 

बस्ती! वर्दी पहनकर वर्षों तक लोगों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने वाले थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह की जिंदगी शनिवार शाम सरकारी आवास में रहस्यमय परिस्थितियों में थम गई। डीएम कार्यालय के पास स्थित सरकारी आवास में उनका शव पंखे से गमछे के सहारे लटका मिला। कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था। 

 

सूचना पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए। फोरेंसिक टीम ने जांच शुरू कर दी। डीआईजी संजीव त्यागी ने बताया कि मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। मामले में सभी पहलुओं की जांच कराई जा रही है। वर्दी में रहते हुए लोगों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह ने यह कदम क्यों उठाया यह अभी तक साफ नहीं है। वह कुछ घंटे पहले तक ड्यूटी कर रहे थे। शनिवार की शाम जब आवास का दरवाजा खुला तो अंदर का दृश्य देखकर पुलिसकर्मी भी सन्न रह गए। पंखे से गमछे के सहारे लटका शव कई सवाल पीछे छोड़ गया। पुलिस घटना के कारणों और उनके हालिया दिनों की गतिविधियों समेत हर पहलू की पड़ताल में जुटी है। देर रात लखनऊ से बस्ती पहुंचे परिवारी-जन भी एसओ सूर्य प्रकाश सिंह की आत्महत्या की वजह के बारे में कुछ बता नहीं पा रहे हैं। 

इस घटना को लेकर पुलिस महकमे में शोक की लहर है। मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। पुलिस घटना के कारणों की जांच कर रही है।

बताया जा रहा है कि सूर्य प्रकाश सिंह शनिवार को वाल्टरगंज थाने में मौजूद थे। सुबह उन्होंने स्टाफ मीटिंग कर पुलिसकर्मियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए और रोज की तरह कामकाज निपटाया। शाम को सरकारी वाहन से शहर पहुंचे। हमराहियों को सिविल लाइन पुलिस चौकी पर रुकने के लिए कहकर वह अपने सरकारी आवास चले गए। इसके बाद कुछ ही देर में उनकी जिंदगी हमेशा के लिए खामोश हो गई।

सूर्य प्रकाश सिंह को जिंदादिल और मिलनसार पुलिसकर्मियों में गिना जाता था। सिद्धार्थनगर से स्थानांतरण के बाद बस्ती में उनकी पहली तैनाती पासपोर्ट कार्यालय में हुई थी। इसके बाद उन्हें एसपी का पीआरओ बनाया गया। बेहतर कार्यशैली के चलते उन्हें वाल्टरगंज थाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

रक्षाबंधन से पहले उनका परिवार लखनऊ स्थित आवास पर चला गया था। रक्षाबंधन पर भी उन्होंने छुट्टी नहीं ली थी। घटना की सूचना मिलने के बाद देर रात परिवार के लोग बस्ती पहुंचे। परिजन भी इस सवाल का जवाब नहीं दे सके कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि हमेशा दूसरों का हौसला बढ़ाने वाले सूर्य प्रकाश सिंह खुद जिंदगी से हार गए।

घटना की सूचना परिवार को देना साथी पुलिसकर्मियों के लिए बेहद कठिन पल था। बेटी लगातार फोन कर अपने पिता की सलामती पूछती रही, लेकिन साथी कर्मियों के लिए उसे सच बताना आसान नहीं था। 

पुलिसकर्मी बस परिवार के बस्ती पहुंचने का इंतजार करते रहे। सूर्य प्रकाश सिंह के परिवार में दो बेटियां और एक बेटा हैं। एक बेटी और बेटे की शादी हो चुकी है।

सूर्य प्रकाश सिंह की मौत की खबर वाल्टरगंज थाने पहुंचते ही वहां सन्नाटा छा गया। सुबह तक जिस थाने में वह पुलिसकर्मियों को दिशा-निर्देश दे रहे थे, वहीं शाम को उनकी मौत की खबर ने सभी को स्तब्ध कर दिया। साथी पुलिसकर्मी उन्हें याद कर भावुक नजर आए।

आजमगढ़ के अतरौलिया थाना क्षेत्र के भीलमपुर छपरा निवासी सूर्य प्रकाश सिंह (57) वर्ष 1988 में आरक्षी के पद पर पुलिस सेवा में भर्ती हुए थे। वर्ष 2008 में हेड कांस्टेबल और वर्ष 2016 में वरिष्ठता के आधार पर उपनिरीक्षक पद पर पदोन्नत हुए। बस्ती में उन्हें पहली बार थाने की कमान मिली थी। वर्षों तक वर्दी में कर्तव्य निभाने के बाद उनकी जिंदगी का इस तरह अंत पूरे पुलिस महकमे और परिचितों को झकझोर गया। अब पुलिस जांच के बाद ही सामने आएगा कि इस दुखद घटना के पीछे आखिर क्या वजह थी।

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