BRICS से भारत देगा दुनिया को बड़ा संदेश
पुतिन पहुंचे, शी जिनपिंग समेत कई दिग्गज नेताओं का आगमन
उमेश चन्द्र त्रिपाठी
नई दिल्ली! राजधानी दिल्ली इस समय दुनिया की कूटनीति का सबसे बड़ा केंद्र बन गई है। 12 और 13 सितंबर को भारत 18 वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है। भारत इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी में होने वाला यह सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है, जब दुनिया रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया के संघर्ष, अमेरिका-चीन तनाव और बदलती वैश्विक आर्थिक व्यवस्था जैसी बड़ी चुनौतियों से गुजर रही है।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 11 सितंबर को दिल्ली पहुंच चुके हैं। उनके साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की द्विपक्षीय बातचीत भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और BRICS के अन्य प्रमुख नेताओं के भी सम्मेलन में शामिल होने की पुष्टि/कार्यक्रम सामने आ चुका है।
BRICS में कितने देश?
आज BRICS में 11 सदस्य देश हैं—
भारत, रूस, चीन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात।
इन 11 देशों के अलावा 10 partner countries भी BRICS के विस्तारित ढांचे का हिस्सा हैं। वहीं दिल्ली में होने वाले सम्मेलन और उससे जुड़ी बैठकों में नेताओं, मंत्रियों और अधिकारियों समेत 32 देशों और एजेंसियों की भागीदारी बताई गई है। इसलिए 11 सदस्य देशों को “BRICS सदस्य” और 32 को सम्मेलन से जुड़ी व्यापक भागीदारी के रूप में समझना जरूरी है।
कौन-कौन बड़े नेता पहुंच रहे हैं?
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दिल्ली पहुंच चुके हैं।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सम्मेलन में शामिल होने वाले प्रमुख नेताओं में हैं।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन भी भारत पहुंच रहे हैं और प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बातचीत प्रस्तावित है।
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली भी सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रमुख नेताओं में शामिल हैं।


संयुक्त अरब अमीरात का प्रतिनिधित्व क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान करेंगे, जबकि सऊदी अरब की ओर से विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद की भागीदारी बताई गई है।
ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा इस सम्मेलन में शामिल नहीं होंगे क्योंकि वह इस वर्ष फरवरी में भारत के AI सम्मेलन के लिए पहले ही भारत आ चुके थे।

BRICS आखिर है क्या?
BRICS मूल रूप से उभरती अर्थव्यवस्थाओं का ऐसा मंच है, जिसका उद्देश्य आर्थिक सहयोग बढ़ाना, व्यापार और निवेश को मजबूत करना और वैश्विक शासन व्यवस्था में विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करना है।
समय के साथ इसका विस्तार हुआ और अब यह 11 देशों का समूह बन चुका है। ये देश मिलकर दुनिया की लगभग आधी आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं।

भारत की अध्यक्षता क्यों महत्वपूर्ण?
2026 में BRICS की कमान भारत के हाथ में है।
भारत की अध्यक्षता का मूल संदेश है—
यानी ऐसी वैश्विक व्यवस्था का निर्माण जो संकटों का सामना करने में सक्षम हो, innovation और technology को बढ़ावा दे, देशों के बीच सहयोग मजबूत करे और विकास को टिकाऊ बनाए।
भारत की कोशिश BRICS को केवल राजनीतिक बयानबाजी का मंच बनाने की नहीं, बल्कि ऐसे व्यावहारिक सहयोग का मंच बनाने की है जिसका असर व्यापार, तकनीक, निवेश, ऊर्जा और आम लोगों की अर्थव्यवस्था तक पहुंचे।
सबसे बड़ा सवाल—क्या BRICS डॉलर को चुनौती देगा?
इस सम्मेलन में डिजिटल भुगतान और सीमा-पार लेनदेन बड़ा मुद्दा है।
भारत BRICS देशों के Central Bank Digital Currencies यानी CBDCs को आपस में जोड़ने की दिशा में प्रस्ताव आगे बढ़ा रहा है। इसका उद्देश्य BRICS देशों के बीच अंतरराष्ट्रीय भुगतान को अधिक तेज, आसान और कम लागत वाला बनाना है।
लेकिन भारत की स्थिति को “डॉलर खत्म करने की कोशिश” के रूप में देखना सही नहीं होगा। Reuters के अनुसार भारत का प्रस्ताव मुख्य रूप से cross-border transactions को आसान बनाने पर केंद्रित है, न कि अमेरिकी डॉलर को तत्काल हटाने पर।
भारत का UPI मॉडल भी दुनिया के सामने
भारत अपने डिजिटल भुगतान के अनुभव, खासकर UPI जैसे सिस्टम, को वैश्विक सहयोग के मॉडल के रूप में सामने रख रहा है।
यदि BRICS देशों के बीच भुगतान व्यवस्था बेहतर होती है तो भविष्य में कारोबारियों, कंपनियों और निवेशकों के लिए अंतर्राष्ट्रीय लेनदेन आसान हो सकता है।
लेकिन इसके सामने तकनीकी और राजनीतिक चुनौतियां भी हैं। अलग-अलग देशों की वित्तीय व्यवस्थाओं, सुरक्षा चिंताओं और मुद्रा विनिमय की समस्याओं का समाधान करना आसान नहीं होगा।
Startup से लेकर Supply Chain तक बड़ा एजेंडा
BRICS 2026 सिर्फ राष्ट्राध्यक्षों की बैठक नहीं है।
सम्मेलन में BRICS Incubator Network, BRICS Startup Innovation Fund और BRICS Logistics Supply-Chain Cooperation Framework जैसे प्रस्तावों पर भी काम हो रहा है।
Startup Incubator Network के जरिए अलग-अलग देशों के startups, incubators और innovation agencies को जोड़ने की कोशिश होगी।
Startup Innovation Fund का उद्देश्य शुरुआती और तेजी से बढ़ रहे startups को सहयोग देना है।
वहीं Supply Chain Framework का मकसद परिवहन, logistics और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति व्यवस्था को ज्यादा मजबूत और resilient बनाना है।
Energy Security भी बड़ा मुद्दा
BRICS में रूस, ईरान, सऊदी अरब और UAE जैसे बड़े ऊर्जा उत्पादक देश हैं, जबकि भारत और चीन दुनिया के बड़े ऊर्जा उपभोक्ताओं में शामिल हैं।
ऐसे में तेल, गैस, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिरता पर चर्चा भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
खासकर तब, जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार मार्गों पर दबाव बढ़ाया है।
पश्चिम एशिया का युद्ध BRICS की परीक्षा
इस बार BRICS सम्मेलन की सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ आर्थिक सहयोग नहीं है।
ईरान BRICS का सदस्य है और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने BRICS के भीतर भी जटिल स्थिति पैदा कर दी है। ईरान और UAE के बीच तनाव तथा क्षेत्रीय संघर्ष के कारण समूह के लिए एक साझा राजनीतिक रुख बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
इसके साथ रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता भी सम्मेलन की पृष्ठभूमि में मौजूद हैं।
मोदी-पुतिन मुलाकात पर दुनिया की नजर
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का दिल्ली पहुंचना भारत-रूस संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पुतिन के बीच बातचीत में व्यापार, ऊर्जा, निवेश, रक्षा, तकनीक और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों जैसे मुद्दे प्रमुख हो सकते हैं।
भारत के लिए रूस के साथ संबंध महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इसी समय भारत अमेरिका और यूरोप के साथ भी अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत कर रहा है।
यही भारत की सबसे बड़ी कूटनीतिक चुनौती है—रूस और चीन जैसे BRICS देशों के साथ सहयोग करते हुए पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंधों का संतुलन बनाए रखना।
मोदी-शी जिनपिंग मुलाकात भी बेहद अहम
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा को भी लंबे समय बाद महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।
मोदी और शी की बातचीत में भारत-चीन संबंध, व्यापार, सीमा से जुड़े मुद्दे और क्षेत्रीय परिस्थितियां चर्चा में आ सकती हैं।
BRICS भारत को चीन के साथ बातचीत का एक बहुपक्षीय मंच भी देता है, जहां दोनों देश अपने मतभेदों के बावजूद आर्थिक और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग कर सकते हैं।
सोनौली और नेपाल सीमा के लिए क्या मतलब?
महराजगंज की सोनौली सीमा भारत-नेपाल व्यापार और आवागमन का महत्वपूर्ण केंद्र है।
BRICS सम्मेलन में logistics, supply chain, cross-border payments और व्यापार को आसान बनाने जैसे मुद्दों पर होने वाली चर्चा भविष्य में सीमा आधारित व्यापार के लिए अप्रत्यक्ष रूप से महत्वपूर्ण हो सकती है।
लेकिन यहां एक तथ्य बिल्कुल साफ रखना जरूरी है—
पुतिन के भारत आने या BRICS Summit की वजह से सोनौली सीमा पर किसी नए प्रतिबंध या तत्काल बदलाव की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
इसलिए यह दावा करना सही नहीं होगा कि “BRICS के कारण सोनौली सीमा बंद होगी” या “पुतिन के आने से सोनौली पर तत्काल असर पड़ेगा।”
सोनौली के लिए वास्तविक महत्व भविष्य की trade connectivity, logistics और cross-border commerce policies में होने वाले बदलावों का होगा।
आम भारतीय के लिए BRICS क्यों महत्वपूर्ण?
BRICS की बैठक का असर तुरंत आम आदमी की जेब पर दिखाई देना जरूरी नहीं है, लेकिन इसके फैसले लंबे समय में कई क्षेत्रों को प्रभावित कर सकते हैं।
व्यापार आसान हुआ तो भारतीय कंपनियों को नए बाजार मिल सकते हैं।
Digital payments बेहतर हुए तो अंतर्राष्ट्रीय लेनदेन आसान हो सकता है।
Energy cooperation बढ़ा तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो सकती है।
Startup fund और innovation network से भारतीय startups को नए निवेशक और विदेशी बाजार मिल सकते हैं।
Supply chain मजबूत हुई तो आयात-निर्यात और logistics को फायदा मिल सकता है।
और Global South की आवाज मजबूत हुई तो विकासशील देशों के मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ज्यादा महत्व मिल सकता है।
भारत दुनिया को क्या संदेश दे रहा है?
भारत BRICS को किसी सैन्य गठबंधन या सीधे तौर पर पश्चिम-विरोधी संगठन के रूप में पेश नहीं कर रहा।
नई दिल्ली की कोशिश है कि अलग-अलग विचारधाराओं और राष्ट्रीय हितों वाले देशों को एक मंच पर लाकर आर्थिक विकास, तकनीक, व्यापार, ऊर्जा, स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और वैश्विक शासन जैसे मुद्दों पर व्यावहारिक सहयोग बढ़ाया जाए।
यही वजह है कि 2026 का BRICS Summit भारत के लिए सिर्फ एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन नहीं है।
यह भारत की बढ़ती कूटनीतिक भूमिका, Global South में उसकी स्थिति और बदलती विश्व व्यवस्था में नई दिल्ली की रणनीति का बड़ा प्रदर्शन है।
अब नजर 12 और 13 सितंबर पर
अब दुनिया की नजर नई दिल्ली पर है।
एक तरफ पुतिन, शी जिनपिंग और पेजेशकियन जैसे नेताओं की मौजूदगी है।
दूसरी तरफ युद्ध, ऊर्जा संकट, व्यापारिक तनाव और बदलती वैश्विक आर्थिक व्यवस्था की चुनौती है।
और इन सबके बीच भारत अध्यक्ष के रूप में BRICS को किस दिशा में ले जाता है—यही इस सम्मेलन की सबसे बड़ी कहानी होगी।
सवाल सिर्फ यह नहीं कि BRICS में कितने देश हैं।
सवाल यह है कि 11 देशों और व्यापक अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी वाला यह मंच क्या दुनिया की बदलती शक्ति-संरचना में वास्तव में कोई ठोस बदलाव ला पाएगा?
नई दिल्ली से निकलने वाला जवाब आने वाले वर्षों की वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है।


