नेपाल ने भन्सार छूट 100 से बढ़ाकर 500 नेपाली रुपये की, सीमावर्ती व्यापारियों ने कहा- राहत नहीं, व्यापार पर संकट बरकरार

भारत-नेपाल सीमा पर निजी सामान लाने की सीमा बढ़ी, व्यापार मंडल ने 2000 भारतीय रुपये तक छूट की मांग उठाई थी

मनोज कुमार त्रिपाठी/ उमेश चन्द्र त्रिपाठी 

महराजगंज! नेपाल सरकार ने भारत-नेपाल सीमा से आने-जाने वाले यात्रियों को निजी उपयोग की वस्तुओं पर मिलने वाली भन्सार (सीमा शुल्क) छूट की सीमा 100 रुपए नेपाली से बढ़ाकर 500 रुपए नेपाली कर दी है। नेपाल के वित्त मंत्रालय की राजपत्र अधिसूचना के अनुसार अब स्थल मार्ग से आने वाले यात्री 500 नेपाली रुपये तक मूल्य की निजी वस्तुएं बिना कस्टम शुल्क के नेपाल ले जा सकेंगे।

हालांकि इस फैसले से सीमावर्ती व्यापारियों को अपेक्षित राहत नहीं मिली है। सोनौली उद्योग व्यापार मंडल के तहसील अध्यक्ष सुभाष जायसवाल और सोनौली व्यापार मंडल के अध्यक्ष विजय रौनियार ने कहा कि 500 नेपाली रुपये की सीमा भारतीय मुद्रा में लगभग 312 रुपये के बराबर है, जो सीमावर्ती व्यापार की जरूरतों के मुकाबले बेहद कम है। उनका कहना है कि इस तरह के प्रतिबंधात्मक नियमों से भारतीय सीमा बाजारों का कारोबार प्रभावित होगा और हजारों परिवारों की आजीविका पर असर पड़ेगा।

गौरतलब है कि इससे पहले नेपाल सरकार ने 100 रुपए नेपाली से अधिक मूल्य के सामान के आयात पर कड़ा प्रतिबंध लगाया था, जिसके बाद सीमा क्षेत्रों में व्यापक विरोध हुआ था और मामला नेपाल संसद तक पहुंचा था। विरोध के बाद नेपाल के वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने छूट सीमा बढ़ाने का आश्वासन दिया था।

नई व्यवस्था में भारत में अध्ययनरत नेपाली विद्यार्थियों को पहले की तरह राहत देते हुए उनके द्वारा नेपाल लाए जाने वाले टैबलेट और लैपटॉप पर किसी प्रकार का कस्टम शुल्क नहीं लगाने का प्रावधान बरकरार रखा गया है।

भैरहवा भन्सार कार्यालय के चीफ कस्टम अफसर हरिहर पौड़ेल ने नए नियम की पुष्टि करते हुए बताया कि अब 100 रुपये नेपाली के स्थान पर 500 नेपाली रुपये तक मूल्य के निजी सामान पर भन्सार शुल्क नहीं लिया जाएगा।

व्यापारियों का कहना है कि यदि सीमा क्षेत्रों के आर्थिक हितों को ध्यान में रखना है तो छूट की सीमा कम से कम 2000 भारतीय रुपये तक बढ़ाई जानी चाहिए, तभी सीमावर्ती बाजारों को वास्तविक राहत मिल सकेगी।

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