भंसार में भारतीय एजेंटों के घुसने पर लगाया प्रतिबंध
रोटी बेटी के संबंध को तार-तार कर रहा है भैरहवा भंसार एजेंट संघ
भैरहवा भंसार एजेंट संघ मात्र एक संगठन
नेपाल सरकार ले संज्ञान,संघ के खिलाफ ले तुरंत एक्शन
उमेश चन्द्र त्रिपाठी
भैरहवा नेपाल!
भारत-नेपाल सीमा पर स्थित भैरहवा भंसार को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। भंसार एजेंट संघ की ओर से भारतीय एजेंटों के भंसार परिसर में प्रवेश पर कथित रूप से प्रतिबंध लगाए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इस फैसले को लेकर भारत-नेपाल के बीच वर्षों पुराने रोटी-बेटी के संबंधों पर भी चर्चा शुरू हो गई है।
बताया जा रहा है कि भैरहवा भंसार एजेंट संघ की ओर से भारतीय एजेंटों के प्रवेश को लेकर आपत्ति जताई गई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या किसी संगठन को भंसार परिसर में प्रवेश और कामकाज को लेकर इस तरह के प्रतिबंध लगाने का अधिकार है? यदि ऐसा कोई निर्णय लिया गया है तो उसके पीछे वैधानिक आधार क्या है और संबंधित नेपाली सरकारी निकाय की अनुमति ली गई है या नहीं, यह भी जांच का विषय है।
भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंध हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में दोनों देशों के नागरिकों का रोजाना आवागमन और व्यापारिक गतिविधियां होती हैं। ऐसे में भंसार से जुड़े किसी भी निर्णय का सीधा असर सीमावर्ती व्यापारियों, एजेंटों और दोनों देशों के नागरिकों पर पड़ सकता है।
स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि भैरहवा भंसार एजेंट संघ मात्र एक संगठन है, ऐसे में क्या वह सरकारी अधिकार क्षेत्र से जुड़े किसी मामले में स्वयं नियम या प्रतिबंध लागू कर सकता है? यदि भारतीय एजेंटों के प्रवेश पर वास्तव में रोक लगाई गई है, तो इसकी वैधानिकता और आदेश जारी करने वाले पक्ष की अधिकारिता की जांच आवश्यक है।
वहीं, भैरहवा भंसार प्रमुख हरिहर पौडेल ने भारतीय एजेंटों के आरोपों से अलग अपना पक्ष रखा है। उनका कहना है कि किसी भी अधिकृत एजेंट के प्रशासनिक भवन में प्रवेश पर उनकी ओर से कोई रोक नहीं लगाई गई है। निर्धारित प्रक्रिया के तहत अधिकृत व्यक्ति कार्यालय में आकर अपना काम कर सकता है।
भंसार प्रमुख के इस बयान के बाद अब मामले में सवाल और गहरा गया है, क्योंकि भारतीय एजेंटों की ओर से प्रशासनिक भवन में प्रवेश नहीं दिए जाने का आरोप लगाया जा रहा है। ऐसे में एक तरफ भंसार प्रमुख प्रवेश पर किसी तरह की रोक से इनकार कर रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ भारतीय एजेंट व्यवहार में प्रवेश नहीं मिलने का दावा कर रहे हैं।
मामले को लेकर मांग उठ रही है कि नेपाल सरकार ले संज्ञान,संघ के खिलाफ ले तुरंत एक्शन और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यह स्पष्ट किया जाए कि भंसार परिसर में प्रवेश, एजेंटों के कामकाज और व्यापारिक गतिविधियों को नियंत्रित करने का अधिकार किस सरकारी निकाय के पास है।
भारत-नेपाल सीमा पर व्यापार और आवागमन से जुड़े मामलों में दोनों देशों के बीच समन्वय बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में किसी संगठन के स्तर पर लिया गया कथित निर्णय यदि दोनों देशों के व्यापारिक या सामाजिक संबंधों को प्रभावित करता है, तो संबंधित नेपाली प्रशासन और सरकार की ओर से स्थिति स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
अब देखना होगा कि नेपाल सरकार और संबंधित भंसार प्रशासन इस मामले में क्या संज्ञान लेते हैं और भारतीय एजेंटों के प्रवेश को लेकर लगाए गए कथित प्रतिबंध पर क्या कार्रवाई होती है।