उमेश चन्द्र त्रिपाठी
काठमांडू। नेपाल में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी का रौद्र रूप विनाश की ऐसी तस्वीर सामने ला रहा है, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया है। रसुवा से लेकर नुवाकोट, धादिङ, गोरखा, चितवन, तनहुँ और पूर्वी नवलपरासी तक बाढ़ का असर है। इस भयावह संकट के बीच भारत ने नेपाल के लिए मदद के दरवाजे खोल दिए हैं, वहीं नेपाल पुलिस के जवान खुद खतरे में उतरकर लोगों की जान बचाने में जुटे हैं।
संकट में नेपाल के साथ खड़ा भारत
आपदा की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री से फोन पर बातचीत की। पीएम मोदी ने स्थिति की जानकारी लेते हुए भारत की ओर से हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया। भारत की ओर से राहत और सहायता पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों की मदद के लिए काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने इमरजेंसी हेल्पलाइन शुरू की है। ये नंबर WhatsApp पर भी उपलब्ध हैं—
+977 985 131 6807
+977 970 910 7500
+977 981 032 6117
जान की बाजी लगाकर जिंदगी बचा रही नेपाल पुलिस
बाढ़ के तेज बहाव के सामने जहां कदम रखना भी खतरे से खाली नहीं है, वहीं नेपाल पुलिस के जवान अपनी जान की परवाह किए बिना रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे हैं। घरों, सड़कों और बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए पुलिसकर्मी लगातार अभियान चला रहे हैं।
पुलिस ने लोगों को सख्त चेतावनी दी है—सिर्फ फोटो और वीडियो बनाने के लिए बाढ़ प्रभावित इलाकों में न जाएं। नदी-नालों के किनारे, तेज बहाव वाले क्षेत्रों और जोखिम वाली जगहों से दूरी बनाए रखें और सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों का पालन करें।

केंद्रीय पुलिस प्रवक्ता ने बताया रेस्क्यू का पूरा हाल
नेपाल पुलिस के केंद्रीय प्रवक्ता प्र. ना. म. नि. अबि नारायण काफ्ले ने बताया कि भोटेकोशी और त्रिशूली नदी की बाढ़ से कई जिले प्रभावित हैं। पुलिस ने खोज, बचाव और राहत अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बड़े पैमाने पर जनशक्ति तैनात की है।

प्रवक्ता के मुताबिक रसुवा के विभिन्न पुलिस कार्यालयों में तैनात 64 पुलिसकर्मियों में 32 संपर्क में हैं, जबकि 28 पुलिसकर्मी अब भी संपर्कविहीन हैं। वहीं, विभिन्न प्रभावित जिलों में अब तक 100 शव बरामद किए जा चुके हैं।
काफ्ले ने बताया कि केंद्रीय पुलिस मुख्यालय से अतिरिक्त मेडिकल टीम के साथ 22 पुलिसकर्मियों की टीम रसुवा भेजी गई है। रेस्क्यू और लापता लोगों की तलाश को तेज करने के लिए चार ड्रोन भी लगाए गए हैं। प्रभावित जिलों में स्थानीय पुलिस के साथ वरिष्ठ अधिकारियों को फोकल पर्सन के तौर पर तैनात किया गया है।

घायलों के उपचार में समन्वय के लिए वीर अस्पताल, सिविल अस्पताल, त्रिवेणी शिक्षण अस्पताल और KMC अस्पताल में पुलिस अधिकारियों की तैनाती की गई है। एयरपोर्ट पर शवों के प्रबंधन और मृतकों के परिजनों से समन्वय के लिए हेल्प डेस्क बनाया गया है। लापता पर्यटकों की तलाश के लिए भी विशेष पुलिस अधिकारी को जिम्मेदारी दी गई है।
नेपाल पुलिस ने साफ किया है कि लापता पुलिसकर्मियों और बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे नागरिकों की तलाश एवं बचाव अभियान लगातार जारी रहेगा।

कुदरत का कहर बेहद भारी है, लेकिन इस संकट के बीच नेपाल पुलिस के जवानों का साहस और भारत की ओर से बढ़ाया गया मदद का हाथ हजारों लोगों के लिए उम्मीद की किरण बना हुआ है।


