The India Express News की पड़ताल में पार्किंग ठेके के नियमों और मौके पर हो रही कथित वसूली के बीच कई गंभीर सवाल सामने आए। भाजपा नेता जितेंद्र जायसवाल ने उच्चस्तरीय जांच, पिछले पांच वर्षों के ठेकों का ऑडिट और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
नौतनवा/महराजगंज। आदर्श नगर पालिका परिषद नौतनवा के टैक्सी स्टैंड एवं पार्किंग ठेके को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। The India Express News की पड़ताल में नगर पालिका के आधिकारिक कार्यादेश एवं अनुबंध पत्र की प्रति का अध्ययन किया गया, जिसमें पार्किंग शुल्क वसूली से जुड़े नियमों और मौके पर सामने आए घटनाक्रम के बीच कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े हो रहे हैं।
अनुबंध में क्या है?
नगर पालिका परिषद नौतनवा द्वारा जारी कार्यादेश के अनुसार टैक्सी स्टैंड एवं पार्किंग का ठेका 01 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक के लिए ₹10,80,000 में दिया गया है।

अनुबंध में पार्किंग शुल्क की दरें इस प्रकार निर्धारित हैं—
लॉरी, मिनी बस, बस, मेटाडोर एवं अन्य बड़े वाहन – ₹80 प्रतिदिन।
टैक्सी, जीप, ट्रैक्टर, ई-रिक्शा एवं छोटे वाहन – ₹40 प्रतिदिन।

सबसे महत्वपूर्ण शर्त संख्या-09
अनुबंध में स्पष्ट उल्लेख है—
> “समस्त व्यावसायिक वाहन, भारी वाहन तथा सवारी गाड़ी जो पार्किंग स्थल से हटकर नगर सीमा क्षेत्र में सवारी उतारता-बैठाता अथवा सामान उतारने एवं लादने का कार्य करता है, उससे पार्किंग शुल्क लेने का अधिकार ठेकेदार का होगा।”
The India Express News द्वारा उपलब्ध कराए गए अनुबंध का अवलोकन करने पर कहीं भी निजी (प्राइवेट) कार, निजी चारपहिया या व्यक्तिगत उपयोग के वाहनों से पार्किंग शुल्क लेने का स्पष्ट उल्लेख नहीं मिला। अनुबंध में केवल व्यावसायिक वाहनों तथा सवारी चढ़ाने-उतारने अथवा सामान लादने-उतारने वाले वाहनों का उल्लेख किया गया है।
नेपाली निजी वाहन चालक का आरोप
मौके पर मौजूद एक नेपाली निजी वाहन चालक ने बताया कि वह भुटवल (नेपाल) से आ रहे थे। चालक के अनुसार, ठूठीबारी तिराहे पर कुछ लोगों ने उन्हें रोककर नगर पालिका के नाम पर ₹40 की मांग की।
जब उन्होंने पूछा कि यह किस बात का शुल्क है, तो कथित रूप से जवाब मिला कि यह नगर पालिका का शुल्क है। चालक ने बताया कि उसने पैसे नहीं दिए और रसीद मांगी, लेकिन उसे कोई रसीद उपलब्ध नहीं कराई गई। चालक का यह भी दावा है कि उसे बताया गया कि पिछले दो-तीन महीनों से इस प्रकार की वसूली की जा रही है।

पहचान पत्र और दस्तावेज मांगने पर शुरू हुई बहस
घटनास्थल पर मौजूद The India Express News के पत्रकार ने कथित वसूली कर रहे कर्मचारियों से पूछा कि वे किस नियम के तहत पार्किंग शुल्क मांग रहे हैं। उनसे पहचान पत्र, अधिकृत दस्तावेज और अनुबंध की प्रति भी मांगी गई।
पहले दस्तावेज दिखाने से बचने का प्रयास किया गया। बाद में एक कार्यादेश दिखाया गया, लेकिन पत्रकार द्वारा उसकी प्रति मांगे जाने पर तत्काल उपलब्ध नहीं कराई गई।
वसूली करने वाले पक्ष ने क्या कहा?
कथित वसूली करने वाले पक्ष ने अनुबंध की शर्त संख्या-09 का हवाला देते हुए कहा कि नगर सीमा क्षेत्र में सवारी उतारने-बिठाने अथवा सामान लादने-उतारने वाले वाहनों से पार्किंग शुल्क लिया जा सकता है।

हालांकि पत्रकारों ने सवाल उठाया कि संबंधित नेपाली वाहन न तो सवारी उतार रहा था, न सवारी बैठा रहा था और न ही सामान लादने या उतारने का कार्य कर रहा था। ऐसे में उससे ₹40 किस नियम के तहत मांगे जा रहे थे, इसका स्पष्ट उत्तर मौके पर नहीं दिया गया।
भाजपा नेता जितेंद्र जायसवाल ने उठाए गंभीर सवाल
पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेता जितेंद्र जायसवाल ने कहा कि यदि नगर पालिका के अनुबंध में निजी वाहनों से पार्किंग शुल्क लेने का कोई प्रावधान नहीं है और फिर भी उनसे शुल्क लिया जा रहा है, तो यह नियमों के विपरीत है।
उन्होंने कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित पार्किंग ठेका तत्काल निरस्त किया जाए।
उन्होंने यह भी मांग की कि—
पिछले पांच वर्षों के टैक्सी स्टैंड एवं पार्किंग ठेकों की जांच कराई जाए।
हर वर्ष ठेका राशि में हुई बढ़ोतरी की समीक्षा की जाए।
अन्य नगर पंचायतों और नगर पालिकाओं की तुलना में नौतनवा का ठेका किन आधारों पर दिया गया, इसकी जांच हो।
यदि नियमों के विपरीत वसूली हो रही है तो संबंधित ठेकेदार एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि सड़क के बीच वाहन रोककर पार्किंग शुल्क वसूलना गलत है। इससे जाम की स्थिति उत्पन्न होती है और आम लोगों को परेशानी होती है। प्रशासन को इस पर तत्काल संज्ञान लेना चाहिए।
ईओ से पक्ष लेने की कोशिश रही नाकाम
इस पूरे मामले में नगर पालिका परिषद नौतनवा के अधिशासी अधिकारी संदीप कुमार सरोज से भी संपर्क किया गया। उन्होंने पहले बताया कि वह कार्यालय में मौजूद हैं।

हालांकि लगभग दस मिनट बाद जब The India Express News की टीम नगर पालिका कार्यालय पहुंची तो वह वहां मौजूद नहीं मिले। कर्मचारियों ने पहले बताया कि वह अपने कक्ष में हैं, लेकिन बाद में जानकारी दी गई कि वह महाराजगंज के लिए निकल चुके हैं। इस कारण समाचार प्रकाशित होने तक उनका आधिकारिक पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।

अब उठ रहे हैं बड़े सवाल
जब अनुबंध में निजी वाहनों से पार्किंग शुल्क लेने का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, तो उनसे शुल्क किस आधार पर मांगा जा रहा है?
क्या संबंधित वाहन वास्तव में व्यावसायिक श्रेणी में आता था?
क्या वह नगर सीमा क्षेत्र में सवारी चढ़ा-उतार रहा था या सामान लाद-उतार रहा था?
क्या वसूली करने वाले कर्मचारियों के पास अधिकृत पहचान पत्र और वैध प्राधिकरण था?
क्या सड़क पर वाहन रोककर पार्किंग शुल्क वसूली करना नगर पालिका की शर्तों के अनुरूप है?
इन सभी सवालों का जवाब अब प्रशासनिक जांच और नगर पालिका के आधिकारिक स्पष्टीकरण के बाद ही सामने आएगा। यदि जांच में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो यह मामला नगर पालिका की पार्किंग व्यवस्था, ठेका प्रक्रिया और वसूली प्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर सकता है। वहीं यदि नगर पालिका के पास इस संबंध में कोई अतिरिक्त आदेश या नियम हैं, तो उन्हें सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करना भी आवश्यक होगा।