नौतनवा पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल, भाजपा नेता बोले—“पीड़ित बताएगा घटना, दरोगा नहीं”

28 जुलाई की तहरीर पर कार्रवाई न होने का आरोप, महिला ने 10 दिन से सुनवाई न होने का दावा; दूसरे मामले में तहरीर और धाराएं बदलने का आरोप

नौतनवा। नौतनवा थाना पुलिस की कार्यशैली को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। भाजपा नेता ने थाना प्रभारी अभिषेक सिंह पर कथित मनमाने रवैये का आरोप लगाते हुए कहा कि थाने में आने वाले पीड़ितों की शिकायत पर कानून के मुताबिक कार्रवाई करने के बजाय यह तय किया जा रहा है कि उनके साथ आखिर घटना क्या हुई।

भाजपा नेता का आरोप है कि 28 जुलाई को एक मुस्लिम महिला ने पुलिस को तहरीर देकर फोन पर कथित तौर पर अश्लील बातें करने और परेशान किए जाने की शिकायत की थी, लेकिन 9 अगस्त तक मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। उनका कहना है कि थाना प्रभारी से पूछने पर CDR मंगाए जाने की बात कही गई।

“रात में फोन कर परेशान करते हैं”

पीड़ित महिला ने अपनी आपबीती बताते हुए आरोप लगाया कि रात करीब 10 से 11 बजे के बीच उसे फोन किए जाते हैं। महिला के मुताबिक, फोन करने वाले कथित तौर पर आपत्तिजनक बातें करते हुए उसे परेशान करते हैं और अलग-अलग नंबरों से भी संपर्क किया गया।

महिला ने बताया कि उसने मामले की जानकारी अपने पति को दी। पति ने भी संबंधित लोगों से बात कर उन्हें ऐसा करने से रोकने का प्रयास किया, लेकिन कथित तौर पर परेशानी जारी रही।

महिला का कहना है कि उसने पुलिस में शिकायत की, लेकिन करीब 10 दिन बीत जाने के बाद भी कोई ठोस सुनवाई नहीं हुई।

दूसरे मामले में तहरीर बदलने का आरोप

वहीं बरियाहवां गांव निवासी परमेश्वर ने भी पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परमेश्वर का दावा है कि गांव का ही राजन नामक युवक रात करीब साढ़े दस बजे उसके घर पहुंचा और उसकी भाभी के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ की। विरोध करने पर उसकी मां के साथ मारपीट की गई, जिससे उनकी नाक पर चोट लगने का आरोप है।

परमेश्वर के मुताबिक, घटना के बाद परिवार थाने पहुंचा और शिकायत दी, लेकिन उसका आरोप है कि थाने में उसकी तहरीर बदल दी गई और धाराओं में भी बदलाव कर दिया गया। पीड़ित का कहना है कि शिकायत के अनुरूप अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।

“छेड़छाड़ को हटाकर सिर्फ मारपीट का मामला बनाने का आरोप”

भाजपा नेता ने भी इसी मामले का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि महिला द्वारा लगाए गए छेड़छाड़ के आरोप को हटाकर मामले को सामान्य मारपीट के रूप में दर्ज किया गया। उन्होंने पुलिस से महिला के बयान और आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की मांग किए जाने की बात कही।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पीड़ित किसी घटना की शिकायत लेकर थाने पहुंचता है तो उसकी शिकायत को उसी रूप में दर्ज कर निष्पक्ष जांच क्यों नहीं की जाती?

पुलिस कप्तान तक शिकायत पहुंचाने का दावा

भाजपा नेता ने कहा कि दोनों मामलों को लेकर उन्होंने क्षेत्राधिकारी के साथ-साथ पुलिस कप्तान के संज्ञान में भी मामला पहुंचाने का प्रयास किया। उनका दावा है कि उन्होंने पुलिस कप्तान को व्हाट्सऐप के माध्यम से भी शिकायत भेजी, लेकिन उन्हें अभी तक संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय स्तर पर पुलिस की ऐसी कार्यशैली से उत्तर प्रदेश सरकार की कानून-व्यवस्था और जनहितकारी छवि पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

“कानून से ऊपर कोई नहीं”

भाजपा नेता ने पुलिस प्रशासन से मांग की कि थाना प्रभारी अभिषेक सिंह की कार्यशैली की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी पुलिसकर्मी के खिलाफ शिकायतें सामने आती हैं तो वरिष्ठ अधिकारियों को मामले की जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए।

CO नौतनवा ने कहा—“विधिक कार्रवाई के लिए थाना पुलिस को निर्देश”

मामले में CO नौतनवा से संपर्क साधकर पुलिस का पक्ष जानने का प्रयास किया गया। CO नौतनवा ने बताया कि मामले की जानकारी उन्हें प्राप्त हो गई है और विधिक कार्रवाई के लिए संबंधित थाना पुलिस को निर्देशित कर दिया गया है।

CO के इस बयान के बाद अब देखना होगा कि संबंधित थाना पुलिस शिकायतों पर क्या कार्रवाई करती है और जांच में लगाए गए आरोपों की सच्चाई क्या सामने आती है।

फिलहाल शिकायतकर्ताओं और भाजपा नेता द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस जांच और आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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