पूर्व मंत्री और पूर्वांचल के सबसे बड़े बाहुबली नेता अमर मणि त्रिपाठी के चुनाव लड़ने में आ सकता है गंभीर कानूनी अड़चन?

उमेश चन्द्र त्रिपाठी 

महराजगंज! वर्तमान कानूनी नियमों के अनुसार अमर मणि त्रिपाठी सजा माफी (समय से पहले रिहाई) के बाद भी चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। 

हालांकि उन्होंने बीते 30 अगस्त 2026 को फरेंदा कस्बे में स्थित कृष्णा मैरेज हॉल में एक कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश की फरेंदा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान किया है, लेकिन उनकी उम्मीदवारी में गंभीर कानूनी अड़चनें हैं।अमर मणि त्रिपाठी के चुनाव न लड़ पाने का मुख्य कारण अभी सजा कम या खत्म नहीं हुई। 

कानून के जानकारों के मुताबिक उत्तर प्रदेश सरकार की ‘समय से पहले रिहाई नीति’ के तहत अमर मणि त्रिपाठी को केवल उनके अच्छे आचरण और उम्र के आधार पर जेल से रिहाई (माफी) मिली है, लेकिन कोर्ट द्वारा दी गई आजीवन कारावास की सजा खत्म या रद्द नहीं हुई है।

भारत के जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 (3) के तहत, यदि किसी व्यक्ति को 2 वर्ष या उससे अधिक की सजा होती है, तो वह जेल में रहने के दौरान और रिहाई की तारीख से अगले 6 वर्षों तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो जाता है। 

अमर मणि त्रिपाठी को 25 अगस्त 

2023 को जेल से समय से पहले रिहा किया गया था। इस नियम के तहत उनकी 6 साल की अयोग्यता अगस्त 2029 तक जारी रहेगी। इस वजह से वह 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए कानूनी तौर पर अयोग्य हैं।

अमर मणि त्रिपाठी केवल एक ही शर्त पर चुनाव लड़ सकते हैं- यदि देश की कोई उच्च अदालत (जैसे सुप्रीम कोर्ट) उनकी दोषसिद्धि पर पूरी तरह से रोक लगा दे या उनकी सजा को रद्द कर दे। जब तक ऐसा नहीं होता, उनका चुनावी मैदान में उतरना संभव नहीं है।

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