मनोज कुमार त्रिपाठी
महराजगंज ! देश में प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान लगातार सामने आ रहे पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने और पुनर्परीक्षाओं के मामलों ने लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य को अनिश्चितता के भंवर में धकेल दिया है। बीते दो वर्षों में कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें परीक्षा संबंधी तनाव, निराशा और मानसिक दबाव के बीच अभ्यर्थियों की मौत या कथित आत्महत्या के मामलों ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया।
उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में 22 जून 2026 को 19 वर्षीय NEET अभ्यर्थी चंचल भारती की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि 21 जून को आयोजित NEET पुनर्परीक्षा के बाद वह मानसिक तनाव में थी। पुलिस को घटनास्थल से परीक्षा सामग्री और एक हस्तलिखित नोट भी मिला है। मामले की जांच जारी है।
इसी दौरान लखनऊ में एक 18 वर्षीय NEET अभ्यर्थी की मौत का मामला भी चर्चा में रहा। परिजनों के अनुसार परीक्षा रद्द होने और भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण वह लंबे समय से तनाव में थी।
गाजियाबाद में 20 जून 2026 को 22 वर्षीय NEET अभ्यर्थी जतिन कुमार की मौत ने भी गंभीर बहस छेड़ दी। बताया गया कि वह कई वर्षों से मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा था और पुनर्परीक्षा से पहले उसने एक वीडियो संदेश भी रिकॉर्ड किया था।

राष्ट्रीय स्तर पर भी स्थिति चिंताजनक दिखाई दी। कोयंबटूर, देहरादून, दिल्ली और राजस्थान के सीकर समेत कई शहरों से NEET विवादों और पुनर्परीक्षाओं के बीच अभ्यर्थियों की आत्महत्या अथवा संदिग्ध मौतों की खबरें सामने आईं। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार जून 2026 के दौरान ऐसे मामलों की संख्या दोहरे अंक तक पहुंच गई थी।
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2024 के दौरान यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा और RO/ARO परीक्षा से जुड़े विवादों के बीच भी कई अभ्यर्थियों के मानसिक तनाव की खबरें सामने आईं। कन्नौज और फिरोजाबाद सहित विभिन्न जिलों से युवाओं द्वारा आत्मघाती कदम उठाने की घटनाओं ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाए।
इन घटनाओं का प्रभाव केवल अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं है। उनके माता-पिता और अभिभावक भी मानसिक, सामाजिक और आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं। इसका एक मार्मिक उदाहरण मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में देखने को मिला, जहां Government Girls College परीक्षा केंद्र पर NEET 2026 पुनर्परीक्षा के दौरान छात्रा रागिनी विश्वकर्मा अपने पिता के साथ निर्धारित समय से लगभग दो मिनट देरी से पहुंची। गेट बंद हो जाने के कारण उसे प्रवेश नहीं मिला। इसके बाद बेटी को परीक्षा में बैठाने की गुहार लगाते हुए पिता का भावुक वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से वायरल हुआ, जिसने लाखों परिवारों की पीड़ा को सामने ला दिया।
शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि पेपर लीक केवल परीक्षा प्रणाली की खामी नहीं है, बल्कि यह लाखों युवाओं की वर्षों की मेहनत, परिवारों के आर्थिक निवेश और उनके मानसिक संतुलन पर सीधा प्रहार है। बार-बार परीक्षा रद्द होने, परिणामों में देरी और पुनर्परीक्षाओं की अनिश्चितता से अभ्यर्थियों में तनाव, अवसाद और निराशा की भावना बढ़ रही है।
आज सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि आखिर कब तक देश के युवाओं को परीक्षा माफियाओं, प्रशासनिक लापरवाही और व्यवस्था की कमियों की कीमत चुकानी पड़ेगी? कब तक लाखों छात्रों के सपने पेपर लीक और परीक्षा विवादों की भेंट चढ़ते रहेंगे?
युवाओं की मेहनत, उनके सपनों और देश के भविष्य की रक्षा के लिए परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और मानसिक स्वास्थ्य सहायता तंत्र को मजबूत बनाना अब समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुकी है।