फरेंदा विधानसभा चुनाव 2027 में नए त्रिपाठी की एंट्री !

फरेंदा को जिला बनाना मेरी निश्चित लड़ाई होगी: डॉ. निशांत त्रिपाठी

“जनता एक बार खुद से पूछे—जिसे वोट दिया, उसने काम किया या नहीं” – डॉ. निशांत

“सड़क-नाली से आगे बढ़े विकास की सोच”, रोजगारपरक शिक्षा और युवाओं के लिए बड़े रोजगार मेले का वादा

बंद चीनी मिल के लैंड बैंक का औद्योगिक इस्तेमाल—डॉ. निशांत त्रिपाठी का बड़ा विजन

सरकारी नौकरी छोड़ राजनैतिक विरासत को धार देने जनसेवा में उतरे निशांत त्रिपाठी

मनोज कुमार त्रिपाठी

फरेंदा।

आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर फरेंदा विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो रही है। इसी बीच फरेंदा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे डॉ. निशांत त्रिपाठी ने द इंडिया एक्सप्रेस न्यूज़ के निदेशक मनोज कुमार त्रिपाठी से एक्सक्लूसिव बातचीत में क्षेत्र के विकास को लेकर अपना रोडमैप सामने रखा। करीब 19 वर्ष की सरकारी सेवा के बाद जनसेवा की नई पारी शुरू करने का निर्णय लेने वाले डॉ. त्रिपाठी ने रोजगार, शिक्षा, औद्योगिक विकास, बंद चीनी मिल, फरेंदा को जिला बनाने की मांग और मतदाताओं की भूमिका जैसे प्रमुख मुद्दों पर अपनी स्पष्ट राय रखी।

राजनैतिक विरासत को धार देने जनसेवा में उतरे निशांत त्रिपाठी

विशुनपुर अदरौना निवासी डॉ. निशांत त्रिपाठी ने कहा कि उनका गांव उनकी जन्मभूमि होने के साथ-साथ सामाजिक संस्कारों की पहली पाठशाला भी है। पूर्वजों से मिली सेवा, त्याग और समर्पण की परंपरा को आगे बढ़ाना उनके लिए प्राथमिकता है। गोरखपुर के बेतियाहाता स्थित कमला निवास से जुड़े राजनीतिक इतिहास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पूर्वजों से मिली राजनीतिक विरासत उनके लिए केवल गौरव का विषय नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है।

 

 

करीब 19 वर्षों तक सरकारी सेवा में रहने के बाद राजनीति और जनसेवा की ओर रुख करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य सत्ता या पद हासिल करना नहीं, बल्कि जनता के बीच रहकर क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए काम करना है। उनका कहना है कि राजनीति तभी सार्थक है, जब उसका सीधा लाभ आम जनता तक पहुंचे।

रोजगार को बताया विकास की पहली प्राथमिकता

डॉ. निशांत त्रिपाठी ने कहा कि फरेंदा के लिए उनके रोडमैप में सबसे ऊपर रोजगार है। उनका कहना है कि क्षेत्र का पढ़ा-लिखा युवा आज भी 10 से 15 हजार रुपये की नौकरी के लिए दूसरे शहरों में भटक रहा है। ऐसे में उनकी कोशिश होगी कि क्षेत्र में ही ऐसे रोजगार के अवसर पैदा किए जाएं, जिससे युवाओं को अपने घर और क्षेत्र में रहकर काम मिल सके।

उन्होंने कहा कि विकास का मतलब केवल सड़क और नाली बनना नहीं है। जब तक आम आदमी की आय और जीवन स्तर में सुधार नहीं होगा, तब तक विकास को पूर्ण नहीं माना जा सकता।

रोजगारपरक शिक्षा पर विशेष जोर

डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि यदि उन्हें जनता का नेतृत्व करने का अवसर मिलता है तो शिक्षा के क्षेत्र में उनकी पहली प्राथमिकता रोजगारपरक शिक्षा होगी।

उनके अनुसार तीन महीने, छह महीने और एक वर्ष जैसे अल्पकालिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को ऐसी स्किल दी जा सकती है, जिससे वे रोजगार पाने या अपना रोजगार शुरू करने के योग्य बन सकें।

उन्होंने कहा कि उनका पहला लक्ष्य क्षेत्र के युवाओं को जल्द से जल्द रोजगार से जोड़ना होगा।

एक साल के भीतर बड़े रोजगार मेले की योजना

रोजगार मेले पर लगातार जोर देने की वजह बताते हुए डॉ. निशांत त्रिपाठी ने कहा कि उन्हें इसका व्यावहारिक अनुभव है। भारत सरकार की नौकरी में रहते हुए उन्होंने कई बड़े रोजगार मेलों का आयोजन कराया और उन्हें सफल बनाने का अनुभव प्राप्त किया।

उन्होंने कहा कि यदि क्षेत्र के युवाओं को पहले प्रशिक्षित कर रोजगार के योग्य बनाया जाए और उसके बाद कंपनियों तथा रोजगार देने वाली संस्थाओं से उनका सीधा संपर्क कराया जाए तो बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार दिलाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि अवसर मिलने पर रोजगारपरक शिक्षा लागू कराने के बाद एक वर्ष के भीतर बड़े रोजगार मेले का आयोजन उनकी प्राथमिकताओं में रहेगा।

बंद चीनी मिल को लेकर क्या है योजना?

फरेंदा की लंबे समय से बंद पड़ी चीनी मिल को लेकर डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि क्षेत्रीय दौरे के दौरान यह मामला उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी उन्होंने मिल का आधिकारिक स्थलीय निरीक्षण नहीं किया है, इसलिए मशीनरी की वास्तविक स्थिति पर अंतिम टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।

हालांकि उन्होंने कहा कि तकनीकी दृष्टि से लंबे समय से बंद पड़ी मशीनों की स्थिति की जांच जरूरी है। यदि मिल को दोबारा शुरू किया जा सकता है तो उसकी संभावनाएं तलाशनी चाहिए।

वहीं, अगर किसी कारण से मिल को पुनः शुरू करना संभव नहीं है तो वहां उपलब्ध बड़े भू-भाग यानी लैंड बैंक का औद्योगिक उपयोग किया जा सकता है, ताकि नए उद्योग स्थापित हों और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हों।

विकास के लिए जाति-धर्म से ऊपर उठकर साथ चलने की बात

डॉ. निशांत त्रिपाठी ने कहा कि क्षेत्र का चौतरफा विकास तभी संभव है जब हर जाति, धर्म और उम्र के लोगों को साथ लेकर चला जाए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विकास का एजेंडा किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं होना चाहिए।

उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि चुनाव के समय केवल पार्टी देखकर मतदान करने के बजाय उम्मीदवार की योग्यता, समझ, नेतृत्व क्षमता और उसके काम का मूल्यांकन करें।

इसी क्रम में उन्होंने कहा कि जनता को भी चुनाव के बाद अपने प्रतिनिधि के काम का मूल्यांकन करना चाहिए और खुद से यह सवाल पूछना चाहिए कि जिसे वोट दिया, उसने क्षेत्र के लिए वास्तव में काम किया या नहीं।

प्रति व्यक्ति आय को बताया विकास का असली पैमाना

डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि किसी क्षेत्र के वास्तविक विकास का आकलन केवल सड़कों और नालियों से नहीं किया जा सकता। इसके लिए प्रति व्यक्ति आय और आम आदमी के जीवन स्तर को देखना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि जिस दिन क्षेत्र का हर व्यक्ति आर्थिक रूप से इतना सक्षम होगा कि उसे किसी मुफ्त सुविधा पर निर्भर रहने की जरूरत महसूस न हो, उस दिन वास्तविक विकास की स्थिति मानी जा सकेगी।

फरेंदा को जिला बनाने की मांग पर स्पष्ट रुख

फरेंदा को जिला बनाने की लंबे समय से चली आ रही मांग पर डॉ. निशांत त्रिपाठी ने कहा कि यह मांग बहुत पहले ही पूरी हो जानी चाहिए थी।

उन्होंने कहा कि वे स्वयं फरेंदा क्षेत्र के रहने वाले हैं और उन्होंने क्षेत्र को लंबे समय से देखा है। उनके अनुसार फरेंदा ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण और विकसित क्षेत्र रहा है, इसके बावजूद इसे जिला बनाने की मांग अब तक पूरी नहीं हुई।

उन्होंने कहा कि फरेंदा जिला क्यों नहीं बना और इसके पीछे क्या कारण रहे हैं, इस पर वे अभी कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते। लेकिन यदि जनता उन्हें नेतृत्व का अवसर देती है तो फरेंदा को जिला बनवाने की लड़ाई उनकी निश्चित प्राथमिकता होगी।

चुनावी मैदान में डॉ. निशांत का दावा

तकनीकी और अकादमिक क्षेत्र से आने वाले डॉ. निशांत त्रिपाठी ने अपने अनुभव को जनसेवा से जोड़ने की बात कही। इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा की पृष्ठभूमि के साथ उन्होंने भारत सरकार के अधीन विभिन्न प्रशासनिक और अकादमिक जिम्मेदारियां निभाने का उल्लेख किया।

अब चुनावी मैदान में उनका फोकस रोजगार, रोजगारपरक शिक्षा, औद्योगिक विकास, प्रति व्यक्ति आय और फरेंदा को जिला बनाने जैसे मुद्दों पर दिखाई दे रहा है।

वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में मजबूत राजनीतिक दल के साथ मैदान में उतरने की तैयारी को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज है। हालांकि, उनके चुनाव लड़ने और राजनीतिक दल को लेकर अंतिम तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं है।

अब सवाल यह है कि करीब 19 वर्ष की सरकारी सेवा और तकनीकी-प्रशासनिक अनुभव के बाद राजनीति में उतर रहे डॉ. निशांत त्रिपाठी का यह विकास मॉडल फरेंदा की जनता को कितना प्रभावित करता है और आगामी चुनाव में इसका कितना राजनीतिक असर दिखाई देता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *