उमेश चन्द्र त्रिपाठी
बांग्लादेश की सरकार ने मोंगला बंदरगाह के निकट आर्थिक क्षेत्र (इकोनॉमिक ज़ोन) के विकास का जिम्मा एक चीनी सरकारी कंपनी को सौंप दिया है। यह समझौता पीएम तारिक रहमान की चीन यात्रा के दौरान हुआ। मूल रूप से यह प्रोजेक्ट भारत के लिए प्रस्तावित था, लेकिन राजनीतिक संबंधों में बदलाव के कारण इसे चीन को दे दिया गया।
चटोग्राम के बाद बांग्लादेश का दूसरा सबसे बड़ा बंदरगाह, जो कोलकाता से मात्र 188 किलोमीटर दूर सुंदरबन के पास स्थित है।
‘चाइना सिविल इंजीनियरिंगकंस्ट्रक्शन चाइना सिविल इंजीनियरिंगकंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन’ (CCECC) इस क्षेत्र का
विकास करेगी। इस परियोजना का उद्देश्य विनिर्माण उद्योग, गोदाम और भंडारण सुविधाएं स्थापित करना है।

यह कदम बंगाल की खाड़ी में चीन की उपस्थिति बढ़ाता है और इसे भारत की सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बदलाव माना जा रहा है।
हाल ही में बांग्लादेश ने एक बड़ा रणनीतिक फैसला लेते हुए मोंगला पोर्ट का इकोनॉमिक जोन प्रोजेक्ट भारत से लेकर चीन को सौंप दिया है।
साल 2015 में भारत और बांग्लादेश के बीच मोंगला बंदरगाह के पास 110 एकड़ जमीन पर एक भारतीय आर्थिक क्षेत्र विकसित करने का समझौता हुआ था।

बांग्लादेश की उस समय की अंतरिम सरकार ने कथित तौर पर इस परियोजना को भारत की सूची से हटा दिया था और चीनी सरकारी कंपनी के साथ इसे विकसित करने का नया समझौता कर लिया था।
मोंगला बंदरगाह कोलकाता और हल्दिया से केवल कुछ ही दूरी पर स्थित है। इस प्रोजेक्ट के चीन के हाथों में जाने से बंगाल की खाड़ी और भारत के पूर्वी तट पर सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।