उमेश चन्द्र त्रिपाठी/मनोज कुमार त्रिपाठी
सोनौली/बेलहिया। भारत-नेपाल सीमा पर भारतीय कस्टम हाउस एजेंट (CHA) और नेपाली कस्टम हाउस एजेंटों के बीच प्रशासनिक भवन में प्रवेश को लेकर कई दिनों से चल रहा विवाद अब समाप्ति की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। सहायक आयुक्त, सीमा शुल्क (Assistant Commissioner of Customs) सुधीर कुमार त्यागी ने बातचीत में कहा कि दोनों पक्षों के बीच सकारात्मक माहौल में वार्ता हुई है और उम्मीद है कि बुधवार को प्रस्तावित बैठक के बाद विवाद का स्थायी समाधान निकल जाएगा।
सुधीर कुमार त्यागी ने बताया कि नेपाल भंसार प्रशासन के प्रमुख अधिकारी से उनकी बातचीत हुई, जिसमें स्पष्ट किया गया कि भारतीय एजेंटों के प्रवेश पर रोक लगाने का नेपाल सरकार का कोई आधिकारिक आदेश नहीं है। उन्होंने कहा कि भंसार प्रशासन की ओर से भारतीय एजेंटों के लिए कोई रोक-टोक नहीं है। अधिकृत पहचान पत्र अथवा रजिस्टर कार्ड के साथ वे भंसार परिसर में अपना कार्य कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि विवाद की मुख्य वजह नेपाल कस्टम हाउस एजेंट महासंघ (CHA Federation) का वह पत्र है, जिसमें प्रशासनिक प्रक्रिया के लिए सीमित संख्या में प्रतिनिधियों को भेजने और उन्हें अधिकृत किए जाने की बात कही गई थी। भारतीय पक्ष ने जब इस संबंध में किसी सरकारी आदेश का प्रमाण मांगा तो ऐसा कोई सरकारी आदेश प्रस्तुत नहीं किया जा सका। इससे यह स्पष्ट हुआ कि यह नेपाल सरकार का निर्देश नहीं, बल्कि महासंघ की आंतरिक व्यवस्था है।

सुधीर कुमार त्यागी के अनुसार, वार्ता के दौरान नेपाली पक्ष इस बात पर सहमत हुआ कि जिन भारतीय एजेंटों का कार्य रिकॉर्ड साफ है और जो वर्षों से ईमानदारी एवं व्यवस्थित ढंग से काम कर रहे हैं, उन्हें भी चरणबद्ध तरीके से अधिकृत किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सुझाव दिया गया है कि शुरुआत में 10 से 20 अधिकृत प्रतिनिधियों को अनुमति दी जाए और व्यवस्था संतोषजनक रहने पर अन्य योग्य एजेंटों को भी शामिल किया जाए। इस प्रस्ताव पर दोनों देशों के प्रतिनिधि आपस में चर्चा कर अंतिम निर्णय लेंगे।
उन्होंने बताया कि भारतीय पक्ष ने यह भी आग्रह किया कि वर्षों से काम कर रहे ईमानदार एजेंटों की आजीविका प्रभावित नहीं होनी चाहिए। यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ शिकायत है या वह गलत गतिविधियों में शामिल पाया जाता है तो उसे चिन्हित कर ब्लैकलिस्ट किया जाए, लेकिन सभी भारतीय एजेंटों पर एक साथ प्रतिबंध लगाना उचित नहीं होगा।
सुधीर कुमार त्यागी ने कहा कि नेपाली पक्ष ने भी अपनी व्यावहारिक परेशानियां सामने रखीं। उनका कहना है कि प्रशासनिक भवन में अत्यधिक भीड़ होने से कामकाज प्रभावित होता है और कई बार अनधिकृत लोग भी दस्तावेजों की प्रक्रिया में शामिल हो जाते हैं। कुछ मामलों में यात्रियों से भंसार प्रक्रिया के नाम पर अवैध रूप से धन वसूली तथा अन्य शिकायतें भी सामने आई हैं। ऐसे मामलों के कारण जवाबदेही तय करना कठिन हो जाता है।
उन्होंने बताया कि नेपाल की ओर से यह भी कहा गया कि जिस प्रकार भारत में H-Card और G-Card धारक अधिकृत प्रतिनिधियों के माध्यम से कार्य किया जाता है और उनकी जिम्मेदारी संबंधित CHA की होती है, उसी प्रकार नेपाल में भी केवल अधिकृत प्रतिनिधियों को कार्यालय के भीतर दस्तावेज प्रस्तुत करने की अनुमति देने की व्यवस्था लागू की जा रही है। यदि कोई अधिकृत व्यक्ति अनियमितता करता है तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित CHA पर तय होगी।
सहायक आयुक्त ने कहा कि भारतीय पक्ष ने नेपाली अधिकारियों को सुझाव दिया है कि अच्छे और साफ छवि वाले एजेंटों को कार्य करने का अवसर दिया जाए तथा केवल गलत और संदिग्ध लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए। यदि कोई व्यक्ति ब्लैकलिस्टेड है या उसके खिलाफ ठोस शिकायत है तो उसकी जानकारी साझा की जाए, ताकि दोनों पक्ष मिलकर ऐसे लोगों पर रोक लगा सकें।
उन्होंने बताया कि नेपाली महासंघ के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारी काठमांडू में बैठक में व्यस्त होने के कारण अंतिम निर्णय मंगलवार को नहीं हो सका। अब बुधवार सुबह दोनों पक्षों के बीच फिर वार्ता होगी। उन्हें विश्वास है कि दोनों पक्ष कुछ मुद्दों पर लचीला रुख अपनाएंगे और आपसी सहमति से समाधान निकालेंगे।
सुधीर कुमार त्यागी ने कहा कि सीमा पर व्यापार और आवागमन को लंबे समय तक प्रभावित रखना किसी के हित में नहीं है। इसलिए सभी पक्षों को सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि बुधवार की बैठक के बाद भंसार से जुड़ा कार्य सामान्य रूप से शुरू हो जाएगा और भारत-नेपाल सीमा पर आयात-निर्यात की गतिविधियां पहले की तरह सुचारु रूप से संचालित होंगी।