भैरहवा भंसार कार्यालय में भारतीय व्यापारियों और एजेंटों की ‘नो एंट्री’! भंसार एजेंट संघ का निर्णय

भारतीय व्यापारियों और एजेंटों में भारी आक्रोश 

उमेश चन्द्र त्रिपाठी 

सोनौली महराजगंज! भारत-नेपाल के सबसे व्यस्त और अंतर्राष्ट्रीय महत्व वाले सोनौली सीमा पर नेपाल के भैरहवा भंसार एजेंट संघ के एक नए फैसले ने सरहद पर भूचाल ला दिया है। 

भारतीय सीमा से सटे नेपाल के बेलहिया स्थित भैरहवा भंसार (कस्टम) कार्यालय में भारतीय एजेंटों के प्रवेश पर प्रभावी रूप से रोक लगा दिए जाने से वर्षों से वहां कामकाज कर रहे सैकड़ों भारतीय एजेंटों की रोजी-रोटी पर अचानक ताला लग गया है। इस फैसले से सीमा के दोनों ओर व्यापारियों, एजेंटों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

जानकारी के अनुसार, वर्षों से भंसार कार्यालय में नेपाल एजेंट संघ अपने अधिकृत प्रतिनिधियों के माध्यम से कार्य कराता रहा है। वहीं, पांच हजार से लेकर 25 हजार रुपये अथवा उससे अधिक मूल्य का फुटकर सामान नेपाल ले जाने वाले भारतीय व्यापारी और आम नागरिक एजेंटों से आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर स्वयं भंसार कार्यालय पहुंचकर अपना माल पास कराते थे। इसी व्यवस्था के सहारे बड़ी संख्या में भारतीय युवाओं की आजीविका चल रही थी।

लेकिन शुक्रवार से सब कुछ बदल गया। भैरहवा भंसार एजेंट संघ ने नया नियम लागू करते हुए साफ कर दिया कि अब भंसार कार्यालय में केवल वही व्यक्ति प्रवेश करेगा जिसके पास नेपाल की नागरिकता होगी और जिसे एजेंट संघ द्वारा अधिकृत किया गया होगा। सबसे हैरानी की बात यह है कि नेपाल स्थित भारतीय दूतावास द्वारा जारी परिचय पत्र रखने वाले भारतीयों को भी न तो कार्यालय में प्रवेश दिया जा रहा है और न ही किसी प्रकार का काम करने की अनुमति मिल रही है।

इस निर्णय के बाद सीमा क्षेत्र में वर्षों से कार्यरत सैकड़ों भारतीय नागरिक एक झटके में बेरोजगार हो गए हैं। कई नेपाली युवा भी इस फैसले से प्रभावित हुए हैं।

भारतीय एजेंटों का आरोप है कि यह फैसला भारत-नेपाल के दशकों पुराने मैत्रीपूर्ण संबंधों और खुली सीमा की भावना के विपरीत है। उनका कहना है कि बिना किसी पूर्व सूचना या वैकल्पिक व्यवस्था के लागू किए गए इस निर्णय ने सैकड़ों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।

सीमा पर इस मुद्दे को लेकर लोगों में जबरदस्त नाराजगी देखी जा रही है। व्यापारिक हलकों में चर्चा है कि यदि स्थिति का शीघ्र समाधान नहीं निकला तो विरोध प्रदर्शन तेज हो सकता है।

भारतीय एजेंटों ने रविवार (आज) को बैठक बुलाकर आगे की रणनीति तय करने का निर्णय लिया है। बैठक के बाद प्रतिनिधिमंडल नेपाल एजेंट संघ के पदाधिकारियों से मुलाकात करेगा और पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग करेगा। 

एजेंटों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन सहित अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जाएगा। अब सबकी निगाहें रविवार की वार्ता पर टिकी हैं।

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