46 दिन के आंदोलन के बाद नौतनवां उपनिबंधक का ट्रांसफर! नागेन्द्र शुक्ला बोले— ‘रिलीव होने तक नहीं खत्म होगा अनशन’

‘भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी’ — उपनिबंधक के तबादले पर नागेन्द्र शुक्ला का बड़ा बयान, मुरादाबाद तक पीछा करने की चेतावनी

उमेश चन्द्र त्रिपाठी 

नौतनवां महराजगंज! 

नौतनवा उपनिबंधक के स्थानांतरण को लेकर लंबे समय से आंदोलन चला रहे अधिवक्ता एवं राजनीतिक कार्यकर्ता नागेन्द्र शुक्ला ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि यह सिर्फ आंदोलन की पहली जीत है, लेकिन उनकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक संबंधित अधिकारी को पूरी तरह कार्यमुक्त (रिलीव) नहीं किया जाता, तब तक उनका अनशन और विरोध जारी रहेगा।

नागेन्द्र शुक्ला ने आरोप लगाया कि नौतनवां उपनिबंधक पर भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और अधिवक्ताओं से दुर्व्यवहार जैसे गंभीर आरोप थे। उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं और आम लोगों से लगातार शिकायतें मिलने के बाद एक अधिवक्ता, सामाजिक चिंतक और राजनीतिक व्यक्ति होने के नाते भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना उनका कर्तव्य बन गया।

उन्होंने बताया कि 12 मई 2025 से उपनिबंधक के खिलाफ आंदोलन शुरू किया गया, जो 46 दिनों तक चला। इस दौरान तत्कालीन जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा के आश्वासन पर अनशन स्थगित किया गया था।शुक्ला के अनुसार, जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने जांच और कार्रवाई का भरोसा दिया था, लेकिन महीनों तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया।

नागेन्द्र शुक्ला ने दावा किया कि बाद में उन्होंने शासन स्तर तक शिकायत पहुंचाई। उन्होंने स्टाम्प एवं पंजीयन मंत्री रवीन्द्र जायसवाल से मुलाकात की, मुख्यमंत्री कार्यालय, कमिश्नर और जिलाधिकारी से भी शिकायत की। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान एडीएम स्तर पर कई अनियमितताओं की पुष्टि हुई, जिसे शासन ने गंभीरता से लिया।

श्री शुक्ला ने बताया कि हाल ही में शासन स्तर पर विशेष सचिव के समक्ष हुई सुनवाई में उपनिबंधक कई सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इसके बाद देर रात उन्हें उपनिबंधक के स्थानांतरण की सूचना मिली, जिसकी पुष्टि अगले दिन समाचार पत्रों और विभागीय अधिकारियों द्वारा भी हुई।

हालांकि, नागेन्द्र शुक्ला ने साफ कहा कि केवल ट्रांसफर से वे संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि कई मामलों में अधिकारी स्थानांतरण के बावजूद महीनों तक पुराने स्थान पर कार्य करते रहते हैं। इसलिए वे तब तक आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे, जब तक संबंधित अधिकारी को पूरी तरह कार्यमुक्त नहीं कर दिया जाता।

साथ ही उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अधिकारी मुरादाबाद में कार्यभार ग्रहण करते हैं तो वे वहां के अधिवक्ता संघ से संपर्क कर संबंधित शिकायतों का पूरा दस्तावेज लेकर पहुंचेंगे और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।

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