सीमावर्ती भारतीय बाजारों में पसरा सन्नाटा
सीमा पर बढ़ेगी महंगाई, रोजमर्रा की जिंदगी पर असर
नेपाल प्रशासन के नए फैसले से सीमावर्ती गरीब और मजदूर वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित
उमेश चन्द्र त्रिपाठी
महराजगंज! नेपाल प्रशासन द्वारा भारत के बाजारों से 100 रुपये से अधिक की खरीददारी पर भंसार (कस्टम) शुल्क लगाने की घोषणा ने सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वर्षों से खुली सीमा का लाभ उठाकर दैनिक जरूरत का सामान भारतीय बाजारों से लाने वाले नेपाली नागरिकों के लिए अब यह व्यवस्था नई परेशानी बनती नजर आ रही है।

सीमा से सटे गांवों और कस्बों में रहने वाले लोगों के लिए भारतीय बाजार ही सस्ता और सुलभ विकल्प रहा है। यहां से लोग रोजाना तेल, नमक, चीनी, दाल, सब्जी, दवा और बच्चों के खाद्य पदार्थ खरीदकर अपने घर की जरूरतें पूरी करते हैं। लेकिन अब 100 रुपये से अधिक के सामान पर भंसार शुल्क लागू होने से छोटी-छोटी खरीददारी भी महंगी हो जाएगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह फैसला सीधे तौर पर गरीब, मजदूर और दिहाड़ी पर निर्भर परिवारों को प्रभावित करेगा। जो लोग प्रतिदिन 200-300 रुपये का सामान लाकर अपना गुजारा करते हैं, उन्हें अब अतिरिक्त शुल्क देना पड़ेगा, जिससे रसोई का खर्च बढ़ना तय है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का उद्देश्य भले ही राजस्व बढ़ाना और अवैध व्यापार पर रोक लगाना हो, लेकिन इसका प्रभाव आम उपभोक्ताओं पर ज्यादा पड़ेगा। बड़े तस्करों के बजाय छोटे खरीददार इस नीति की मार झेलेंगे।

इसके अलावा, इस फैसले से सीमा पार की सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है। वर्षों से बनी आपसी निर्भरता में कमी आने की आशंका जताई जा रही है, जिससे स्थानीय बाजारों की गतिशीलता प्रभावित हो सकती है। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि यह कदम राजस्व बढ़ाने और अनियंत्रित आयात को रोकने के लिए उठाया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत को देखते हुए लोगों में नाराजगी बढ़ती दिख रही है। सीमावर्ती नागरिकों की मांग है कि सरकार इस फैसले पर पुनर्विचार करे और छोटे उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कोई व्यवहारिक समाधान निकाले, ताकि उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पर अनावश्यक बोझ न पड़े।
