उमेश चन्द्र त्रिपाठी
नेपाल के कपिलवस्तु 3 से अभिषेक प्रताप शाह चौथी बार सांसद चुने गये हैं। ऐसे दौर में जब पूरे नेपाल में बदलाव की लहर है। बड़े बड़े दिग्गज नेता चुनाव हार गये हैं ऐसे में श्री शाह का नेपाली कांग्रेस से विजयी होना निश्चित रूप से उनकी लोकप्रियता को दर्शाता है।
इस चुनाव में उनकी पार्टी नेपाली कांग्रेस का प्रदर्शन भी बहुत ही निराशाजनक था। श्री शाह इससे पहले मधेशी जनाधिकार फोरम से दो बार संविधान सभा के सदस्य रह चुके हैं और एक बार राप्रपा से मनोनीत भी हुए थे।
पिछला चुनाव वो नेकपा एमाले के मंगल प्रसाद गुप्ता से हार गये थे। उनके पिता स्वर्गीय अजय प्रताप शाह भी इस क्षेत्र का प्रतिनिधत्व कर चुके हैं। चौथी बार जीत कर श्री शाह ने यह साबित कर दिया है कि जनता की पहली पसंद वो ही हैं।
श्री शाह जब पहली बार सांसद मनोनीत हुए थे। तब उस वक्त उनकी उम्र महज पचीस साल कुछ माह थी। वो नेपाल ही नहीं सम्भवतः एशिया के सबसे कम उम्र के सांसद थे। नेपाल की पत्र पत्रिकाओं ने उन्हें कांक्षा (सबसे छोटा) सांसद के रूप में परिभाषित करते हुए अपने कवर पेज पर प्रमुखता से छापा था।
लोगों को उनसे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि वे जन आकांक्षाओं पर खरे उतरेंगे, और चुनाव में किये गये वादों को पूरा करेंगे।