उच्च कोटि का था राजीव गांधी का व्यक्तित्व

अपने विरोधियों का भी करते थे सम्मान 

यही वह राजनीति थी जहां विपक्ष को मिटाने की नहीं, लोकतंत्र को मजबूत करने की थी सोच 

उमेश चन्द्र त्रिपाठी 

नई दिल्ली! देश के लिए अपनी जान गंवा देने वाले पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी जी न सिर्फ अपने विरोधियों का सम्मान करते थे बल्कि आवश्यकता पड़ने पर उनकी मदद करने में भी पीछे नहीं हटते थे।

इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए चुनाव में कांग्रेस ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। कांग्रेस को 415 सीटें मिली थीं और भाजपा को सिर्फ 2 सीटों से संतोष करना पड़ा था।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई भी ग्वालियर से माधव राव सिंधिया से चुनाव हार चुके थे। 1985 में उनको किडनी की समस्या हुई और उनकी एक किडनी निकालनी पड़ी। इसके बाद 1988 में उनकी दूसरी किडनी में भी समस्या आ गयी।

भारत में उस समय इसका ईलाज सम्भव नहीं था। बाजपेई जी परेशान थे, ईलाज अमेरिका में हो सकता था, लेकिन तब उनके पास या उनकी पार्टी के पास इतने संसाधन नहीं थे कि अमेरिका में रह कर महीने भर ईलाज करवाया जाए।

ये बात राजीव गांधी जी को पता चली। हालांकि 1984 में अचानक राजनीति में आए राजीव गांधी का अटल जी से कोई विशेष सम्बंध नहीं था। अटल जी तब संसद सदस्य भी नहीं थे लेकिन राजीव गांधी ने उनका ईलाज करवाने की सोची। उन्होंने अटल जी को भारत की तरफ से यूनाइटेड नेशन भेजे जाने वाले प्रतिनिधि मण्डल का हिस्सा बनवाया, जो वहां एक महीने रुकने वाला था। फिर उन्हें बुलाकर कहा कि आप को अमेरिका भेजा ही इसीलिए जा रहा है ताकि आप अपना ईलाज करवा सकें।

बाजपेई जी ने अमेरिका में अपना ईलाज करवाया और स्वस्थ होकर वापस आए। उनके इलाज का सारा खर्च भारत सरकार ने वहन किया। लेकिन न तो राजीव जी ने और न ही अटल जी ने कभी इस बात का जिक्र राजीव गांधी के जीवनकाल में किया।

राजीव गांधी की हत्या के बाद जब एक पत्रकार ने अटल बिहारी बाजपेई जी से राजीव गांधी के बारे दो शब्द कहने के लिए कहा तब अटल जी ने बहुत भावुक होकर इस घटना के बारे में बताया।

यही वह राजनीति थी जहां विपक्ष को मिटाने नहीं, लोकतंत्र को मजबूत करने की सोच थी। जहां सत्ता और विपक्ष एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी थे, शत्रु नहीं।

आज परिस्थितियां बिल्कुल अलग हैं। आज भाजपा सरकार में है और कांग्रेस विपक्ष में। लेकिन आज की सत्ताधीन पार्टी के लोग विपक्ष को कमजोर नहीं बल्कि खतम करने की नीयत और सोच रखते हैं। जबकि आज से 30-35 साल पहले तक लोग विपक्षी नेता की जान कैसे बचाएं इसकी चिंता करते थे।

राजीव गांधी जी ने भारत को आधुनिक सोच देने का प्रयास किया – कंप्यूटर और दूरसंचार क्रांति को आगे बढ़ाया, युवाओं को राजनीति में जगह देने की कोशिश की, पंचायती राज को मजबूती देने की दिशा में काम किया और 18 वर्ष की आयु में मतदान का अधिकार देने जैसे बड़े फैसले लिए।

21 मई 1991 को देश ने उन्हें खो दिया, लेकिन उनका योगदान भारतीय राजनीति और आधुनिक भारत के निर्माण में हमेशा याद किया जाएगा।

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