भीड़ और जाम का फायदा उठाकर नेपाल सीमा तक पहुंच रही ब्राउन शुगर व चरस की खेप
मनोज कुमार त्रिपाठी
सोनौली बॉर्डर! भारत-नेपाल सीमा स्थित सोनौली बॉर्डर पर इन दिनों ठेला कारोबार की आड़ में नशीले पदार्थों की तस्करी किए जाने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार बॉर्डर पर लगने वाले जाम और भारी भीड़ का फायदा उठाकर कुछ संदिग्ध लोग ब्राउन शुगर और चरस की खेप को सीमा पार पहुंचाने में सक्रिय हैं।
बताया जा रहा है कि तस्करी में शामिल लोग ठेलों पर जूस पीने, फल खरीदने या सामान्य ग्राहक बनकर पहुंचते हैं और फिर बेहद चालाकी से नशीले पदार्थों की पुड़ियां दूसरे लोगों तक पहुंचा दी जाती हैं। भीड़भाड़ और अव्यवस्थित आवाजाही के कारण ऐसी गतिविधियां आसानी से सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बच जाती हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सीमा क्षेत्र में अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है, जिसका फायदा उठाकर संदिग्ध तत्व बिना किसी संदेह के इधर-उधर आते-जाते रहते हैं। हालांकि लोगों ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी ठेला संचालक इस तरह की गतिविधियों में शामिल नहीं हैं, लेकिन सीमा क्षेत्र में काम करने वाले ठेला कारोबारियों का सत्यापन और परमिट व्यवस्था जरूरी है।
लोगों ने भारत सरकार से अपील की है कि बॉर्डर क्षेत्र में ठेला और छोटे कारोबारियों के लिए एक व्यवस्थित स्थान निर्धारित किया जाए, जहां पहचान और पंजीकरण के साथ कारोबार संचालित हो सके। उनका कहना है कि इससे वैध कारोबार करने वाले लोगों को सुविधा मिलेगी और संदिग्ध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण भी लगाया जा सकेगा।
सूत्रों के मुताबिक हाल ही में एक संदिग्ध तस्कर सीमा क्षेत्र में दाखिल हुआ था, लेकिन वह सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ से बाहर रहा। इसके बाद सीमा पर निगरानी व्यवस्था और जांच प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय नागरिकों ने सीमा क्षेत्र में सीसीटीवी निगरानी बढ़ाने, ठेला संचालकों का सत्यापन कराने, पहचान पत्र अनिवार्य करने और संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने की मांग की है, ताकि भारत-नेपाल सीमा पर नशीले पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।