यूपी की ग्राम पंचायतों में बड़ा प्रशासनिक बदलाव: 27 मई से पूर्व प्रधान बनेंगे प्रशासक
पंचायत चुनाव में देरी के बीच सरकार का बड़ा फैसला, नई पंचायतों के गठन तक संभालेंगे जिम्मेदारी
मनोज कुमार त्रिपाठी
लखनऊ! उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों के कार्यकाल समाप्त होने के साथ ही बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिलने जा रहा है। प्रदेश सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वर्ष 2021 में गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। ऐसे में आगामी पंचायत चुनाव और नई ग्राम पंचायतों के गठन तक प्रदेश भर के निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

पंचायती राज अनुभाग-3 द्वारा जारी शासनादेश में कहा गया है कि पंचायत चुनाव समय पर न हो पाने अथवा अपरिहार्य परिस्थितियों के चलते ग्राम पंचायतों के प्रशासनिक कार्य बाधित न हों, इसके लिए यह व्यवस्था लागू की जा रही है। 27 मई 2026 से सभी निवर्तमान प्रधान अपने-अपने ग्राम पंचायत क्षेत्रों में प्रशासक के रूप में सामान्य प्रशासनिक कार्यों का संचालन करेंगे।
सरकार ने साफ किया है कि प्रशासक के रूप में नियुक्त पूर्व प्रधान कोई बड़ा नीतिगत निर्णय नहीं ले सकेंगे। केवल अत्यावश्यक परिस्थितियों में ही जिलाधिकारी की अनुमति से नीति संबंधी निर्णय लिए जा सकेंगे। इस आदेश के तहत सभी जिलाधिकारियों को अधिकृत किया गया है कि वे संबंधित ग्राम पंचायतों में प्रशासक नियुक्त करने की कार्रवाई सुनिश्चित करें।
शासनादेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि यह व्यवस्था अधिकतम छह माह अथवा नई ग्राम पंचायतों की प्रथम बैठक आयोजित होने तक प्रभावी रहेगी। ऐसे में प्रदेश की हजारों ग्राम पंचायतों में अब चुनावी प्रक्रिया और प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर राजनीतिक हलचल तेज होने की संभावना है।
प्रदेश सरकार के इस फैसले को पंचायत व्यवस्था में प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जबकि राजनीतिक गलियारों में इसे आगामी पंचायत चुनावों की तैयारी से भी जोड़कर देखा जा रहा है।