विधायक की पहल पर स्वीकृत धनराशि से बने कोठई माता मंदिर के निर्माण में अनियमितता के आरोप, ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग उठाई
मनोज कुमार त्रिपाठी
सोनौली/महराजगंज। नगर पंचायत सोनौली के वार्ड संख्या-7 स्थित राहुल नगर के कोठई माता मंदिर में कराए गए निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों और मंदिर समिति ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि विधायक की पहल पर लगभग 2 करोड़ 44 लाख रुपये की स्वीकृत धनराशि से कराए गए निर्माण कार्य में भारी अनियमितताएं बरती गई हैं, जिसके कारण मंदिर भवन की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, निर्माण कार्य पूरा होने के कुछ ही समय बाद पहली बारिश में मंदिर की छत और लिंटर से पानी टपकने लगा। इसके अलावा परिसर में जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से बारिश का पानी जमा हो रहा है, जिससे दीवारों और अन्य निर्माण कार्यों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। लोगों का आरोप है कि निर्माण में मानकों के अनुरूप सामग्री का उपयोग नहीं किया गया और कार्य की गुणवत्ता बेहद खराब रही।
मामले को लेकर जब इंडिया एक्सप्रेस न्यूज़ के निदेशक निर्माण स्थल पर पहुंचे, तो ग्रामीणों के अनुसार वहां निर्माण कार्य बंद मिला, जबकि परियोजना की निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के करीब बताई जा रही है। निरीक्षण के दौरान स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य में कथित अनियमितताओं, घटिया सामग्री के उपयोग और अधूरे कार्यों को लेकर अपनी शिकायतें रखीं। ग्रामीणों का आरोप है कि कार्य पूर्ण हुए बिना ही धनराशि का भुगतान निकाल लिया गया।

आरोपों के संबंध में जब इंडिया एक्सप्रेस न्यूज़ के निदेशक ने ठेकेदार हरिनंदन उपाध्याय से बातचीत की, तो उन्होंने किसी भी प्रकार की अनियमितता से इनकार करते हुए कहा कि ऐसा कोई मामला नहीं है। वहीं उनके सहयोगियों ने भी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि निर्माण कार्य में कोई समस्या नहीं है।
हालांकि ग्रामीणों और मंदिर समिति के सदस्यों का आरोप है कि जब उन्होंने निर्माण कार्य की गुणवत्ता, खर्च हुई धनराशि का हिसाब और कार्य में हुई कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए, तो उन्हें दबाव में लेने का प्रयास किया गया। ग्रामीणों का दावा है कि हरिनंदन उपाध्याय, राहुल कुमार तथा नगर पालिका से जुड़े कुछ लोगों द्वारा उन्हें कथित रूप से जेल भिजवाने, झूठे मुकदमे में फंसाने और कार्रवाई कराने की धमकी दी गई। ग्रामीणों के अनुसार उनसे कहा गया कि उन्हें निर्माण कार्य पर सवाल उठाने का कोई अधिकार नहीं है तथा विरोध जारी रखने पर गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

मंदिर समिति और स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर निर्माण के लिए स्वीकृत सरकारी धन जनता की आस्था और विकास कार्यों के लिए था, इसलिए इसकी निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए। उन्होंने निर्माण कार्य का तकनीकी परीक्षण कराने, खर्च का पूरा विवरण सार्वजनिक करने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच।
निर्माण सामग्री और गुणवत्ता का तकनीकी परीक्षण।
स्वीकृत धनराशि और खर्च का सार्वजनिक विवरण।
धमकी देने के आरोपों की जांच।
दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई।