असलम शेख/ मनोज कुमार त्रिपाठी
गोरखपुर। कैंपियरगंज तहसील के खजुरगांवा गांव में कथित अवैध मिट्टी खनन का मामला अब और गंभीर होता नजर आ रहा है। शिकायतकर्ता राजकुमार ने आरोप लगाया है कि पर्याप्त साक्ष्य, फोटो और वीडियो उपलब्ध होने के बावजूद तहसील प्रशासन ने समय पर मौके की जांच नहीं की। उनका दावा है कि शिकायत को 33 दिनों तक लंबित रखा गया, जिससे आरोपित पक्ष को जमीन जोतकर पूरी तरह समतल करने का मौका मिल गया। बाद में जांच के दौरान खेत समतल मिलने का हवाला देकर शिकायत को निराधार बता दिया गया।

शिकायतकर्ता के अनुसार, 21 मई 2026 को मुख्यमंत्री पोर्टल और तहसील प्रशासन से शिकायत की गई थी कि आराजी संख्या 938, जो न्यायालय में विचाराधीन है, से बिना खनन विभाग की अनुमति मिट्टी का खनन कर उसका व्यावसायिक उपयोग और बिक्री की गई। उनका आरोप है कि यदि शिकायत मिलते ही तत्काल जांच होती, तो कथित अवैध खनन के साक्ष्य मौके पर मिल सकते थे।
राजकुमार का कहना है कि प्रारंभिक जांच के दौरान राजस्व लेखपाल ने ग्रामवासियों के बयान दर्ज किए थे, जिनमें कथित रूप से भूमि से मिट्टी निकालकर बेचने की बात सामने आई। शिकायतकर्ता का यह भी दावा है कि उनके पास खनन के फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग मौजूद हैं, लेकिन इन साक्ष्यों के बावजूद जांच में उन्हें महत्व नहीं दिया गया।


शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित भूमि न्यायालय में विचाराधीन होने के बावजूद वहां कथित रूप से मिट्टी का खनन किया गया और बिना वैध अनुमति के उसकी बिक्री की गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि जमीन समतल किए जाने के बाद उसी आधार पर शिकायत को निराधार बताया गया, जिससे पूरी जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी और जिला खनन अधिकारी से मांग की है कि पूरे प्रकरण की जांच किसी अन्य सक्षम एवं निष्पक्ष अधिकारी से कराई जाए, कथित अवैध खनन, बिना अनुमति मिट्टी बिक्री और जांच में हुई देरी की भी जांच हो तथा यदि अनियमितता सामने आए तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की जाए।

मामले में लगाए गए सभी आरोप शिकायतकर्ता के हैं। आरोपों की आधिकारिक पुष्टि या अंतिम निष्कर्ष अभी शेष है और प्रशासन की ओर से आगे की कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है।
