‘आखिर किसके संरक्षण में रहे सोनौली नगर पालिका के बड़े बाबू संजय श्रीवास्तव?’ एडीएम का आदेश ठेंगा, 9 माह बाद रुका वेतन

9 माह तक नहीं मानी एडीएम की हिदायत

मनोज कुमार त्रिपाठी 

नौतनवा, महराजगंज। नगर पालिका परिषद नौतनवा के लिपिक संजय श्रीवास्तव एक बार फिर प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गए हैं। इस बार मामला सीधे उच्चाधिकारियों के आदेश की अवहेलना से जुड़ा है। अपर जिलाधिकारी द्वारा मूल तैनाती पर वापस भेजे जाने के बावजूद लगभग नौ माह तक उन्होंने कार्यभार ग्रहण नहीं किया। मामले को गंभीरता से लेते हुए नगर पालिका परिषद नौतनवा ने उनका जून माह का वेतन रोक दिया है और पूरे प्रकरण की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी है।

जानकारी के अनुसार, करीब नौ वर्ष पूर्व तत्कालीन जिलाधिकारी के आदेश पर संजय श्रीवास्तव को नवसृजित नगर पंचायत सोनौली से संबद्ध किया गया था। इसके बाद वे लगातार वहीं कार्यरत रहे। 24 अक्टूबर 2025 को तत्कालीन जिलाधिकारी के निर्देश पर अपर जिलाधिकारी डॉ. प्रशांत कुमार ने उन्हें उनके मूल निकाय नगर पालिका परिषद नौतनवा में प्रत्यावर्तित करने का आदेश जारी किया।

बताया जा रहा है कि आदेश जारी होने के बावजूद संजय श्रीवास्तव ने नौतनवा में कार्यभार ग्रहण नहीं किया और सोनौली नगर पंचायत में ही कार्य करते रहे। इस दौरान सरकारी अभिलेखों पर उनके हस्ताक्षर भी होते रहे। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब प्रत्यावर्तन आदेश प्रभावी था, तब उसका अनुपालन आखिर क्यों नहीं कराया गया।

नगर पालिका परिषद नौतनवा के अधिशासी अधिकारी संदीप कुमार सरोज ने स्पष्ट कहा कि उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। बिना कार्य किए वेतन का भुगतान नियमों के विपरीत है। इसी कारण संजय श्रीवास्तव का जून माह का वेतन रोक दिया गया है तथा अग्रिम कार्रवाई के लिए विस्तृत रिपोर्ट सक्षम अधिकारियों को भेज दी गई है।

अधिशासी अधिकारी संदीप कुमार सरोज
अधिशासी अधिकारी संदीप कुमार सरोज

गौरतलब है कि संजय श्रीवास्तव का नाम इससे पहले भी नगर निकाय से जुड़े विभिन्न मामलों में चर्चा में रहा है। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार गौशाला संचालन, मंदिर निर्माण, सड़क सुधार कार्य सहित अन्य विकास योजनाओं से जुड़े मामलों में भी उनका नाम सामने आया था। अब प्रशासनिक आदेश की अवहेलना का यह नया मामला सामने आने के बाद पुराने प्रकरण भी फिर चर्चा में हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर एडीएम के स्पष्ट आदेश के बावजूद संजय श्रीवास्तव नौ माह तक सोनौली में किसके संरक्षण में कार्य करते रहे? और यदि आदेश का पालन नहीं हुआ, तो इसकी जिम्मेदारी केवल एक कर्मचारी की है या संबंधित अधिकारियों की भी जवाबदेही तय होगी?

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